
चंडीगढ़ । कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा (Congress MP Kumari Sailja) ने कहा कि मोदी सरकार के फैसलों से (Through Modi Government’s Decisions) देश की अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर नहीं हो सकती (Country’s Economy cannot become Self-reliant) ।
सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य कुमारी सैलजा ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार की नीतियां छोटे कारोबारियों, स्वरोजगार करने वालों और युवाओं के हितों के विरुद्ध हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार के इस जनविरोधी कदम पर पहली प्रतिक्रिया देते हुए पहले दी गई अपनी चेतावनी को दोहराया है। सरकार को जनहित में यह फैसला तत्काल वापस लेना चाहिए। कुमारी सैलजा ने कहा कि कारोबार को बढ़ावा देने के नाम पर छोटे दुकानदारों, स्वरोजगार से जुड़े युवाओं और छोटे-छोटे काम करके परिवार चलाने वाले लोगों पर अप्रत्यक्ष रूप से अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। कहीं एक लाख रुपये की रियायत का दिखावा किया जा रहा है तो कहीं नए नियमों और शर्तों के माध्यम से आम कारोबारी की मुश्किलें बढ़ाई जा रही हैं। सरकार स्पष्ट करे कि आखिर उसकी वास्तविक नीति क्या है और इन फैसलों से किस वर्ग को लाभ पहुंचाया जा रहा है।
सांसद ने कहा कि भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों में छोटे व्यापारियों और आम लोगों के हितों के बजाय बड़े कारोबारी समूहों तथा विदेशी दबावों की छाप दिखाई देती है। बड़े देशों के सामने झुककर लिए जाने वाले फैसलों से देश की अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर नहीं हो सकती। छोटे कारोबारियों को कमजोर करना केवल व्यापार क्षेत्र पर हमला नहीं, बल्कि रोजगार और स्वरोजगार के अवसर तलाश रहे लाखों युवाओं के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार जीडीपी के कितने भी आकर्षक आंकड़े प्रस्तुत करे, अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति आम आदमी की जिंदगी, उसकी आय, खर्च, रोजगार और बाजार की दशा से सामने आती है। महंगाई, बेरोजगारी और लगातार बढ़ते आर्थिक बोझ ने गरीब तथा मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है। कांग्रेस की स्पष्ट नीति है कि छोटे कारोबारियों, स्वरोजगार करने वालों और युवाओं को संरक्षण एवं प्रोत्साहन मिले। केंद्र सरकार जनभावनाओं का सम्मान करते हुए अपने फैसले की समीक्षा करे और इसे तत्काल वापस ले।
कुमारी सैलजा ने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रहे अधिवक्ता नवनीश नेगी को कथित धमकी मिलना अत्यंत गंभीर मामला है। भाजपा सरकार बताए कि उत्तराखंड में आखिर किसके संरक्षण में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि न्याय की लड़ाई लड़ने वाले अधिवक्ता भी सुरक्षित नहीं हैं। अंकिता भंडारी प्रकरण पहले ही व्यवस्था पर अनेक गंभीर सवाल खड़े कर चुका है और अब उनके पक्ष के अधिवक्ता को धमकी मिलना कानून-व्यवस्था पर एक और बड़ा प्रश्नचिह्न है। सरकार निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को कानून के सामने लाए, अधिवक्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करे और एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए। देवभूमि में अपराधियों का भय नहीं, कानून का शासन होना चाहिए।
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