
नई दिल्ली: भारत में काम कर रही विदेशी सोशल मीडिया कंपनियों को लेकर केंद्र सरकार (Central government) ने अपना रुख पूरी तरह सख्त कर लिया है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘मेटा’ (Meta) के उच्च अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की. इस बैठक में सरकार की ओर से कंपनी को कड़ा और साफ संदेश दिया गया है. नए दिशानिर्देशों के मुताबिक, अगर सोशल मीडिया पर कोई गैर-कानूनी या भ्रामक AI कंटेंट पोस्ट किया जाता है, तो शिकायत या सरकारी आदेश के 3 घंटे के भीतर प्लेटफॉर्म्स (जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और X) को उसे हटाना अनिवार्य होगा. महिलाओं और बच्चों से जुड़े संवेदनशील या अश्लील डीपफेक मामलों में यह कार्रवाई 2 घंटे के भीतर करनी होगी.
‘अमेरिकी कानून से नहीं चलेंगे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म’
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मेटा के अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा कि भारत में काम करने के लिए अमेरिकी कानून या नीतियां नहीं चलेंगी. कंपनियों को हर हाल में भारत के नियम और कानूनों का पालन करना होगा. सरकार का मानना है कि भारतीय यूज़र्स की सुरक्षा, डेटा प्राइवेसी और देश की संप्रभुता से जुड़ा कोई भी समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा.
AI कंटेंट पर ‘लेबल’ लगाना अनिवार्य
कंटेंट क्रिएटर्स के लिए अहम फरमान, अब अगर वे AI टूल्स के जरिए फोटो, ऑडियो या वीडियो बनाते हैं तो पारदर्शिता बनाए रखना अनिवार्य कर दिया गया है. फोटो या वीडियो के कम से कम 10% हिस्से पर साफ तौर पर ‘AI-Generated’ का लेबल दिखाना होगा. एआई आवाज में बनी क्लिप्स में बोलकर डिस्क्लेमर देना जरूरी होगा. हर एआई फाइल में एक स्थायी डिजिटल कोड रहेगा, जिससे कंटेंट बनाने वाले की पहचान आसानी से की जा सकेगी.
नियमों का उल्लंघन पड़ा भारी तो होगी कानूनी कार्रवाई
अगर कोई सोशल मीडिया कंपनी तय समय-सीमा के भीतर फर्जी या अश्लील कंटेंट हटाने में विफल रहती है, तो वह कानून के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा खो देगी. इसके बाद उस कंपनी और कंटेंट अपलोड करने वाले यूजर पर आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है. सरकार का साफ संदेश है कि इंटरनेट को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए तकनीक के दुरुपयोग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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