img-fluid

अदालत पहुंचा कोर्ट फीस के बिना वक्फ मुकदमों को खारिज करने का मामला, गुजरात HC के आदेश को चुनौती

August 08, 2026

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है, जिसमें कोर्ट फीस जमा नहीं करने के कारण वक्फ से जुड़े मुकदमों को खारिज करने के फैसले को बरकरार रखा गया था। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह में जवाब मांगा है। यह मामला अहमदाबाद सुन्नी मुस्लिम वक्फ कमेटी की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका पर सुनवाई जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने की। पीठ ने 7 अगस्त को आदेश देते हुए कहा, ‘नोटिस जारी किया जाए, छह सप्ताह में जवाब दिया जाए’।

वक्फ संस्थाओं से जुड़े कुछ मामलों में गुजरात राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल ने पर्याप्त कोर्ट फीस जमा नहीं होने के आधार पर कार्यवाही स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ वक्फ संस्थाओं ने गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया था। गुजरात हाईकोर्ट ने दिसंबर 2025 में इन याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा था कि वक्फ संस्थाओं को वक्फ अधिनियम की धारा 83 के तहत राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल में मामला दायर करने के लिए कोर्ट फीस से पूरी तरह छूट नहीं मिली हुई है। इसके बाद जनवरी 2026 में हाईकोर्ट ने इसी आधार पर एक अन्य मामले में वक्फ मुकदमों को खारिज करने के फैसले को बरकरार रखा। अब इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।


  • अहमदाबाद सुन्नी मुस्लिम वक्फ कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि गुजरात हाईकोर्ट ने वक्फ अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों की सही तरीके से व्याख्या नहीं की। कमेटी की ओर से अधिवक्ता एजाज मकबूल ने याचिका दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि वक्फ अधिनियम या उसके नियमों में कोर्ट फीस के भुगतान का कोई प्रावधान नहीं है। याचिका के मुताबिक, जब कानून और नियम कोर्ट फीस लेने का प्रावधान ही नहीं करते हैं, तो वक्फ संस्थाओं से कोर्ट फीस की मांग नहीं की जा सकती। कमेटी का कहना है कि अधिनियम और नियमों में कोर्ट फीस के भुगतान का प्रावधान न होना यह दिखाता है कि ऐसी फीस को जानबूझकर लागू नहीं किया गया है।

    गुजरात हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर 2025 को वक्फ संस्थाओं की ओर से दायर कई याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इन याचिकाओं में गुजरात राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल के उन आदेशों को चुनौती दी गई थी, जिनमें वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों में पर्याप्त कोर्ट फीस नहीं होने के कारण कार्यवाही को खारिज कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि वक्फ संस्थाओं को वक्फ अधिनियम की धारा 83 के तहत ट्रिब्यूनल में दायर की जाने वाली कार्यवाही में कोर्ट फीस से कोई सामान्य या पूरी छूट हासिल नहीं है। हाईकोर्ट ने इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया था कि धारा 83 के तहत मामला सामान्य सिविल मुकदमे की तरह ‘सूट’ या वाद के रूप में नहीं, बल्कि आवेदन के जरिए शुरू होता है। इसलिए कोर्ट फीस नहीं ली जानी चाहिए।

    मुख्य सवाल यह है कि क्या वक्फ अधिनियम की धारा 83 के तहत वक्फ ट्रिब्यूनल में कार्यवाही शुरू करने के लिए वक्फ संस्थाओं को कोर्ट फीस का भुगतान करना जरूरी है या कानून में ऐसी फीस का प्रावधान नहीं होने के कारण उन्हें इससे छूट प्राप्त है।

    Share:

  • वैश्विक बाजारों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं बिहार के उत्पाद - केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल

    Sat Aug 8 , 2026
    नई दिल्ली । केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Union Minister Piyush Goyal) ने कहा कि बिहार के उत्पाद (Bihar’s Products) वैश्विक बाजारों में (In Global Markets) अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं (Are making their Presence Felt) । सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शनिवार को एक पोस्ट में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved