
भोपाल। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सरकारी स्कूलों (Goverment School) में अब सिर्फ शिक्षकों (Teachers) की उपस्थिति ही ऑनलाइन दर्ज नहीं होगी, बल्कि विद्यार्थियों की हाजिरी का रिकॉर्ड भी डिजिटल किया जाएगा। लोक शिक्षण संचालनालय (Directorate of Public Instruction) ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति (Online Presence) दर्ज करने के लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (District Education Officers) को निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था एजुकेशन पोर्टल 3.0 के जरिए लागू की जाएगी। विभाग का कहना है कि विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति पढ़ाई की गुणवत्ता से सीधे जुड़ी है। ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार होने से स्कूलों से लेकर विभागीय स्तर तक यह निगरानी की जा सकेगी कि कौन से विद्यार्थी नियमित स्कूल आ रहे हैं और किनकी उपस्थिति लगातार कम है।
नई व्यवस्था में पोर्टल पर संबंधित कक्षा के सभी विद्यार्थियों की सूची दिखाई देगी। कक्षा शिक्षक को प्रत्येक विद्यार्थी की वास्तविक स्थिति के आधार पर उपस्थिति दर्ज करनी होगी। यह प्रक्रिया कक्षा और सेक्शन के अनुसार पूरी की जाएगी।इसके लिए विद्यार्थियों की तीन श्रेणियां रखी गई हैं। उपस्थित, अनुपस्थित और अवकाश पर। पोर्टल पर सामान्य रूप से सभी विद्यार्थियों को उपस्थित दिखाया जाएगा। अनुपस्थित विद्यार्थी के नाम के सामने अनुपस्थित और अवकाश पर रहने वाले छात्र के सामने अवकाश दर्ज करना होगा। इसके बाद जानकारी को सुरक्षित करना होगा।
निर्देशों के मुताबिक कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों की उपस्थिति स्कूल के संस्था लॉगिन से दर्ज की जाएगी। प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थियों की सेक्शनवार जानकारी भरने की जिम्मेदारी संबंधित कक्षा शिक्षक की होगी। विभाग के अनुसार एजुकेशन पोर्टल 3.0 में स्टूडेंट मैनेजमेंट के अंतर्गत स्टूडेंट अटेंडेंस की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके जरिए शिक्षक एक ही स्थान पर पूरी कक्षा की उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे।
विभाग ऑनलाइन उपस्थिति को केवल रोज की हाजिरी दर्ज करने तक सीमित नहीं रखना चाहता। विद्यार्थियों की उपस्थिति के आंकड़ों का नियमित विश्लेषण किया जाएगा। जिन छात्रों की उपस्थिति कम मिलेगी, उनकी पहचान कर उनके लिए अतिरिक्त कक्षाओं और शैक्षणिक सहायता की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।लगातार स्कूल से गायब रहने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों से भी संपर्क किया जाएगा। विभाग का लक्ष्य ऐसे बच्चों को दोबारा नियमित रूप से स्कूल लाना है।
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