
नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में देवगुरु बृहस्पति (Devaguru Brihaspati) को ज्ञान, समृद्धि, संतान, धर्म और भाग्य का कारक ग्रह माना जाता है। मान्यता है कि जब गुरु अपनी उच्च राशि कर्क (Cancer) में स्थित होते हैं तो उनके शुभ प्रभाव में वृद्धि होती है। गुरु की पांचवीं, सातवीं और नौवीं दृष्टि को विशेष माना गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस समय गुरु की इन तीनों दृष्टियों का प्रभाव वृश्चिक, मकर और मीन राशि पर पड़ रहा है। इससे इन राशियों के जातकों को करियर, कारोबार और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।
वृश्चिक राशि: गुरु की पांचवीं दृष्टि से लाभ
गुरु कर्क राशि में रहते हुए वृश्चिक राशि के पंचम भाव पर अपनी पांचवीं दृष्टि डाल रहे हैं। विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे जातकों के लिए समय अनुकूल रह सकता है। नौकरीपेशा लोगों की निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होगी और रणनीति के साथ काम करने पर आर्थिक लाभ के अवसर बन सकते हैं। शेयर बाजार या रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को भी फायदा मिलने की संभावना है। संतान पक्ष से कोई अच्छी खबर मिलने से परिवार में खुशी का माहौल बन सकता है।
मकर राशि: कारोबार और साझेदारी में फायदा
मकर राशि के सप्तम भाव पर गुरु की सातवीं दृष्टि पड़ रही है। यह भाव कारोबार और साझेदारी से संबंधित माना जाता है। ऐसे में नए व्यावसायिक सौदे तय हो सकते हैं और पार्टनरशिप में काम करने वालों को अपेक्षा से अधिक लाभ मिलने के योग बन सकते हैं। नौकरी में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और कार्यस्थल पर प्रतिष्ठा बढ़ सकती है। इससे प्रमोशन के रास्ते भी खुल सकते हैं। वैवाहिक जीवन में चल रही दूरियां कम होने और आपसी तालमेल बेहतर होने की संभावना है।
मीन राशि: भाग्य का मिल सकता है साथ
मीन राशि के स्वामी स्वयं बृहस्पति हैं। गुरु की नौवीं दृष्टि मीन राशि के नवम भाव यानी भाग्य स्थान पर पड़ रही है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इससे लंबे समय से अटके सरकारी और कानूनी कार्यों में प्रगति हो सकती है। नौकरी में मनचाहा ट्रांसफर या विदेश से संबंधित अवसर मिलने के योग बन सकते हैं। कारोबारियों को नए प्रोजेक्ट शुरू करने का मौका मिल सकता है। धार्मिक यात्रा और किसी अनुभवी गुरु या मार्गदर्शक का सहयोग भी प्राप्त हो सकता है।
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