
नई दिल्ली। महाराष्ट्र (Maharashtra)की राजनीति (Politics)में एक बार फिर हलचल तेज(Intense activity) हो गई है। शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी एसपी (NCP (SP))के एनडीए में शामिल होने की अटकलों के बीच पार्टी के आठ लोकसभा सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Prime Minister Narendra Modi) से मुलाकात की है। सुप्रिया सुले की अगुवाई में हुई इस बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि पार्टी सांसदों ने साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री से मुलाकात का मतलब राजनीतिक गठजोड़ या एनडीए में शामिल होना नहीं है। उनके मुताबिक बैठक पूरी तरह महाराष्ट्र के विकास और जनता से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनसीपी एसपी सांसदों के बीच करीब 15 मिनट तक बातचीत हुई। प्रतिनिधिमंडल में सुप्रिया सुले के अलावा शिरूर से सांसद डॉ. अमोल कोल्हे बीड के सांसद बजरंग सोनावणे और सुरेश म्हात्रे समेत पार्टी के अन्य सांसद शामिल रहे। सांसदों ने महाराष्ट्र के अलग अलग क्षेत्रों से जुड़े विकास कार्यों और किसानों की समस्याओं को प्रधानमंत्री के सामने रखा।
सुप्रिया सुले ने बैठक की वजह बताते हुए कहा कि संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल पा रही है। ऐसे में सांसदों के सामने अपने निर्वाचन क्षेत्रों और जनता से जुड़े लंबित मुद्दों को सीधे प्रधानमंत्री के संज्ञान में लाने का रास्ता बचता है। उन्होंने कहा कि जनता के कामों के लिए केंद्र सरकार से संवाद जरूरी है और इसी उद्देश्य से सांसद प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचे थे।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने शरद पवार के लंबे राजनीतिक अनुभव और उनके काम करने के तरीके की भी तारीफ की। प्रतिनिधिमंडल से जुड़े एक सांसद के मुताबिक प्रधानमंत्री ने शरद पवार के उत्साह को राजनीति में काम करने वाले लोगों के लिए एक उदाहरण बताया। इस बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक चर्चाओं को लेकर भी अटकलें लगाई गईं लेकिन सांसदों ने इसे पूरी तरह विकास केंद्रित बैठक बताया।
एनसीपी एसपी सांसदों ने महाराष्ट्र के कई महत्वपूर्ण मुद्दे प्रधानमंत्री के सामने रखे। मराठवाड़ा के सूखाग्रस्त इलाकों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की गई। इसके अलावा उजनी बांध से मांजरा बांध में पानी छोड़ने का मुद्दा भी उठाया गया। किसानों की परेशानी को देखते हुए फसल बीमा योजना में सुधार और प्याज की कीमतों को लेकर भी केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की गई।
महाराष्ट्र के बुनियादी ढांचे से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट भी बैठक के एजेंडे में रहे। नासिक पुणे हाई स्पीड रेलवे परियोजना पुणे नासिक मेट्रो छत्रपति संभाजीनगर में पीएम गति शक्ति योजना और कल्याण मुरबाड रेलवे लाइन के काम में तेजी लाने की मांग की गई। इसके अलावा जेएनपीटी से जुड़े मुद्दों और नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम दिवंगत नेता डीबी पाटिल के नाम पर रखने के प्रस्ताव पर जल्द फैसला लेने की मांग भी सांसदों ने की।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े मुद्दे भी प्रधानमंत्री के सामने रखे गए। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए पीएम केयर्स फंड के तहत सांसदों को मिलने वाली आर्थिक सहायता बढ़ाने और कैंसर उपचार की सुविधाओं का विस्तार करने की मांग की गई। चंद्रभागा नदी के प्रदूषण का मुद्दा भी बैठक में उठाया गया।
हालांकि इस पूरी मुलाकात का सबसे ज्यादा राजनीतिक असर एनडीए में शामिल होने की अटकलों को लेकर देखने को मिला। एनसीपी एसपी सांसद बजरंग सोनावणे ने ऐसी किसी भी संभावना को साफ तौर पर खारिज किया। उन्होंने कहा कि पार्टी विपक्ष में है और विपक्ष में ही रहेगी। उनके मुताबिक सत्ता पक्ष के नेताओं और मंत्रियों से मुलाकात करना राजनीतिक गठबंधन का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। सांसदों को अपने क्षेत्रों के विकास कार्यों के लिए केंद्र सरकार से लगातार संपर्क और फॉलोअप करना पड़ता है।
डॉ. अमोल कोल्हे ने भी बैठक को सकारात्मक बताया और कहा कि राजनीतिक मतभेदों को अलग रखते हुए महाराष्ट्र के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। वहीं परिसीमन विधेयक को लेकर पार्टी ने अपना रुख फिलहाल अंतिम मसौदा सामने आने तक स्पष्ट नहीं किया है। पार्टी का कहना है कि विधेयक संसद में पेश होने के बाद ही उसके प्रावधानों पर चर्चा की जाएगी और विपक्षी गठबंधन के साथ मिलकर फैसला लिया जाएगा।
ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी से एनसीपी एसपी सांसदों की मुलाकात ने भले ही राजनीतिक अटकलों को हवा दी हो लेकिन पार्टी की ओर से फिलहाल एनडीए में जाने की संभावना को साफ तौर पर खारिज किया गया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर शरद पवार गुट का रुख क्या रहता है और महाराष्ट्र की राजनीति में इस मुलाकात का कोई बड़ा राजनीतिक असर सामने आता है या नहीं।
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