नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी (AI) अब केवल तकनीक की दुनिया तक सीमित नहीं रह गया है। यह आने वाले समय में वैश्विक शक्ति संतुलन और सुपरपावर (Superpower) की स्थिति तय करने वाला अहम हथियार बनता जा रहा है। मेटा के CEO मार्क जकरबर्ग (Mark Zuckerberg) ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने ऊर्जा उत्पादन और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की रफ्तार तेज नहीं की, तो चीन AI की वैश्विक दौड़ में अमेरिका से आगे निकल सकता है।
जकरबर्ग ने एक नोट में कहा कि एडवांस AI को विकसित करने और बड़े पैमाने पर अपनाने में जो देश आगे रहेंगे, उनका आने वाले समय के भू-राजनीतिक शक्ति संतुलन पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। उनके मुताबिक, इसका असर लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक समृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा तक देखने को मिल सकता है।
जकरबर्ग के मुताबिक, AI को बड़े स्तर पर विकसित करने के लिए सिर्फ अत्याधुनिक चिप और सॉफ्टवेयर पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए भारी मात्रा में बिजली, डेटा सेंटर और अन्य भौतिक बुनियादी ढांचे की भी जरूरत होती है। यहीं चीन की तेजी अमेरिका के लिए चिंता का विषय बन रही है।
उन्होंने कहा कि सिलिकॉन डिजाइन के क्षेत्र में अमेरिका को बढ़त हासिल है, लेकिन ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और AI के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में अमेरिका अपेक्षाकृत पीछे है।
जकरबर्ग ने दावा किया कि चीन जैसे देश लगभग हर दूसरे सप्ताह एक गीगावॉट से अधिक परमाणु क्षमता ऑनलाइन ला रहे हैं। ऐसे में अमेरिका को प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए ऊर्जा उत्पादन और डेटा सेंटर निर्माण, दोनों की गति बढ़ानी होगी।
मेटा प्रमुख ने AI इंडस्ट्री को इतिहास की सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धी इंडस्ट्री में से एक बताया। उनका कहना है कि AI के क्षेत्र में कोई तकनीकी उपलब्धि लंबे समय तक किसी एक कंपनी या देश तक सीमित नहीं रहती। नए इनोवेशन को तेजी से कॉपी किया जाता है और कुछ ही महीनों में दूसरे खिलाड़ी उसे अपना लेते हैं।
इसी वजह से जकरबर्ग के मुताबिक दो महीने की बढ़त भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है। उनका मानना है कि AI में लगातार बढ़त बनाए रखना मुश्किल है, क्योंकि तकनीकी प्रगति और प्रतिस्पर्धा दोनों बेहद तेज हैं।
जकरबर्ग ने सिलिकॉन और अत्याधुनिक चिप से जुड़े अमेरिकी निर्यात नियंत्रणों को जारी रखने का समर्थन किया। उनका कहना है कि इन प्रतिबंधों से विदेशी AI विकास को कुछ महत्वपूर्ण समय के लिए धीमा किया जा सका है।
हालांकि, उन्होंने इसके साथ यह भी कहा कि अमेरिका को अपनी घरेलू AI क्षमता को कमजोर करने वाली नीतियों से बचना होगा। उनके मुताबिक, अमेरिकी AI मॉडल की रिलीज में देरी करने वाली कोई भी नीति, यहां तक कि एक महीने की देरी भी, अमेरिकी नेतृत्व के लिए जोखिम बढ़ा सकती है और विदेशी मॉडलों को आगे निकलने का मौका दे सकती है।
जकरबर्ग ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में अमेरिकी सरकार और बड़ी AI कंपनियों के बीच ज्यादा करीबी सहयोग की जरूरत बताई। उनका मानना है कि AI का प्रभाव केवल टेक्नोलॉजी और कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक शक्ति संतुलन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा।
उन्होंने अमेरिका से ओपन-सोर्स AI के क्षेत्र में भी नेतृत्व बनाए रखने की अपील की। जकरबर्ग के मुताबिक, अमेरिकी नीति का लक्ष्य यह होना चाहिए कि दुनिया के सबसे सक्षम ओपन-सोर्स AI मॉडल अमेरिका से आएं।
जकरबर्ग के संदेश का मूल संकेत यही है कि भविष्य की AI रेस केवल बेहतर चैटबॉट या स्मार्ट सॉफ्टवेयर बनाने की प्रतियोगिता नहीं होगी। जिस देश के पास अत्याधुनिक चिप, पर्याप्त ऊर्जा, बड़े डेटा सेंटर, मजबूत AI मॉडल और उन्हें तेजी से तैनात करने की क्षमता होगी, उसे आर्थिक और रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।
यही वजह है कि अमेरिका और चीन के बीच AI की प्रतिस्पर्धा अब तकनीकी कंपनियों से निकलकर ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक भू-राजनीति तक पहुंच गई है।
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