
नई दिल्ली ।हिमाचल प्रदेश (Himachal pradesh)के कांगड़ा जिले में स्थित करीब 400 साल पुराने श्री चामुंडा नंदकेश्वर धाम (Chamunda Nandikeshwar Dham) के नवीनीकरण (Renovation) और सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है। मंदिर के गर्भगृह (Sanctum) को नए रूप में सजाने की तैयारी की जा रही है। इसी क्रम में पंजाब के एक गुमनाम दानदाता (Donor) ने देवी चामुंडा के सिंहासन के लिए 3 किलो सोना (Gold)और गर्भगृह की सजावट के लिए 6 क्विंटल चांदी (Sliver)देने का फैसला किया है।
मंदिर अधिकारी राकेश कुमार के अनुसार, मंदिर में पहले से 2.85 क्विंटल चांदी मौजूद है। नई मिलने वाली 6 क्विंटल चांदी के साथ उपलब्ध कुल चांदी का इस्तेमाल गर्भगृह को सजाने में किया जाएगा। दानदाता ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने का अनुरोध किया है।
मंदिर के नवीनीकरण में अलग-अलग स्थानों के मार्बल का इस्तेमाल किया जा रहा है। गर्भगृह के लिए वियतनाम से मार्बल लाया जा रहा है, जबकि मंदिर के अन्य हिस्सों में राजस्थान के मकराना का मार्बल लगाया जा रहा है। फिलहाल मार्बल से जुड़े काम तेजी से चल रहे हैं और इसे इस साल के अंत तक पूरा करने की उम्मीद जताई गई है।
चामुंडा नंदकेश्वर धाम देवी चामुंडा को समर्पित प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी ने चंड और मुंड नामक राक्षसों का वध किया था। इसी प्रसंग से देवी के चामुंडा नाम से जुड़े होने की मान्यता बताई जाती है।
यह मंदिर बन्नेर खड्ड के किनारे स्थित है और हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मंदिर से जुड़ी परंपराओं में नवविवाहित जोड़ों का यहां आकर पूजा-अर्चना करना भी शामिल है। इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए मंदिर पहुंचते हैं।
मंदिर परिसर के नंदकेश्वर हिस्से का सौंदर्यीकरण पहले ही पूरा किया जा चुका है। यहां भगवान शिव का स्वयंभू शिवलिंग स्थित है, जिसे ऊपर से लटके एक बड़े पत्थर से ढका हुआ बताया जाता है। मंदिर अधिकारी के मुताबिक, यज्ञशाला का काम भी पूरा हो चुका है। मंदिर परिसर में चल रहे अन्य कार्य दानदाताओं के सहयोग से किए जा रहे हैं और कुछ दानदाता अपनी पहचान गुप्त रखना चाहते हैं।
मंदिर की स्थापना से जुड़ी एक पुरानी मान्यता भी प्रचलित है। बताया जाता है कि करीब 400 से 700 वर्ष पहले एक स्थानीय राजा और पुजारी ने देवी से प्रार्थना की थी कि उनका पवित्र स्थान पहाड़ी की दुर्गम चोटी से हटाकर ऐसी जगह स्थापित किया जाए, जहां पहुंचना आसान हो।
मान्यता के अनुसार, देवी पुजारी के सपने में आईं और उन्हें बन्नेर नदी के किनारे वर्तमान स्थान पर खुदाई करने के लिए कहा। वहां पत्थर की एक प्राचीन मूर्ति मिली। शुरुआत में लोगों ने उसे सामान्य पत्थर समझा और कई पुरुषों ने उसे उठाने का प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हुए। अगले दिन पुजारी ने स्नान कर सम्मानपूर्वक उस मूर्ति को उठाया और वर्तमान स्थान पर स्थापित कर दिया।
इसी वजह से चामुंडा मंदिर के साथ नंदकेश्वर धाम का भी धार्मिक महत्व जुड़ा हुआ है। मुख्य देवी मंदिर के पीछे गुफा जैसी जगह में स्वयं प्रकट हुआ शिवलिंग स्थित है। वर्तमान में मंदिर परिसर के नवीनीकरण का काम जारी है और प्रस्तावित सोने-चांदी की सजावट के बाद गर्भगृह का स्वरूप बदलेगा।
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