
शिमला। समुद्रतल से 15,400 फीट की ऊंचाई पर लाहौल-स्पीति जिले (Lahaul-Spiti district) के शिंकुला दर्रा (Shinkula Pass) से होकर बन रही डबल लेन टनल (Double-lane tunnel) ग्लेशियर (Glacier) से महज 500 मीटर की दूरी पर है। बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य को कंपनी के इंजीनियर और कर्मचारी अंजाम दे रहे हैं। ऑक्सीजन की कमी के कारण काम शिफ्टों में किया जा रहा है। सामरिक महत्व की 4.1 किलोमीटर लंबी यह टनल दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई पर बन रही डबल ट्रैफिक टनल है।
बारालाचा होकर मनाली-लेह की दूरी 427 किलोमीटर है। शिंकुला दर्रा होकर मनाली-लेह की दूरी करीब 440 किलोमीटर है। टनल बनने से करीब 100 किलोमीटर दूरी कम होकर 330 किलोमीटर रह जाएगी। सुरंग के बनने से भारतीय सेना को अग्रिम मोर्चों पर पहुंचना आसान हो जाएगा। साथ ही शिंकुला टनल और ग्लेशियर पर्यटकों के लिए एक नया डेस्टिनेशन बनकर उभरेंगे।
मनाली-लेह का वैकल्पिक मार्ग होगा
शिंकुला टनल बनने के बाद लेह-लद्दाख और कारगिल के इलाकों तक पहुंच आसान हो जाएगी। मनाली-लेह मार्ग पर रोहतांग के अलावा बारालाचा, नाकिला, लाचुंगला और तंगलंगला को पार करना पड़ता है। शिंकुला में टनल बनने से कारगिल पहुंचने के लिए मार्ग बदल जाएगा। इसमें सालभर आवाजाही हो सकेगी। साथ ही यह मार्ग वैकल्पिक बन जाएगा।
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