
नई दिल्ली । ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक (‘INDIA’ Bloc Meeting) में सपा प्रमुख अखिलेश यादव शामिल नहीं हुए (SP Chief Akhilesh Yadav did not Attend) ।
विपक्षी गठबंधन की एकजुटता को लेकर हो रही चर्चा के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद सौगत रॉय और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि सपा नेता के पहले से तय जरूरी काम थे। बैठक में अखिलेश यादव के शामिल न होने के बारे में पूछे जाने पर रॉय ने कहा कि सपा प्रमुख ने गठबंधन को पहले ही बता दिया था कि वे लखनऊ में ही रहेंगे। रॉय ने बताया, “हां, हमें यह पता है। अखिलेश यादव ने हमें पहले ही बता दिया था कि वे आज लखनऊ में रामगोपाल यादव का नॉमिनेशन फाइल करने के लिए मौजूद रहेंगे।” बैठक को एक सकारात्मक पहल बताते हुए तृणमूल सांसद ने कहा, “यह कम समय में ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक आयोजित करने की कोशिश है, जो एक अच्छी बात है।”
कांग्रेस नेता राजेंद्रपाल गौतम ने कहा कि बैठक में शामिल होने या किसी प्रतिनिधि को भेजने का फैसला अखिलेश यादव को करना है। साथ ही, उन्होंने जोर दिया कि उनकी पार्टी विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। गौतम ने कहा, “यह अखिलेश यादव को तय करना है कि ‘इंडिया’ गठबंधन का क्या महत्व है और इसे कितना महत्व देना है। वे खुद शामिल हों या अपने प्रतिनिधि को भेजें, यह उनका अधिकार है।” उन्होंने कहा, “हमारा मकसद यह है कि ‘इंडिया’ गठबंधन मजबूत बना रहे, देश के लोकतंत्र और संविधान की रक्षा हो और गठबंधन में शामिल सभी पार्टियों का सम्मान किया जाए, जो हम कर रहे हैं।”
अखिलेश की गैर-मौजूदगी ऐसे समय में हुई है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच रिश्तों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दोनों पार्टियों के बीच चुनावों के लिए सीट-शेयरिंग पर अभी तक कोई समझौता नहीं हो पाया है, जिससे राज्य में उनके चुनावी तालमेल के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में ‘इंडिया’ ब्लॉक के तहत मिलकर चुनाव लड़ा था और गठबंधन ने भाजपा को संयुक्त चुनावी चुनौती दी थी। अब आगामी विधानसभा चुनावों के लिए उनके तालमेल पर बारीकी से नजर रखी जा रही है क्योंकि दोनों पार्टियां अगले चुनावी मुकाबले की तैयारी कर रही हैं। दिल्ली में ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) और चुनाव आयोग को लेकर विपक्षी दलों की चिंताओं पर चर्चा करने के लिए हुई । कई सहयोगी दलों के नेता बैठक में शामिल हुए और इस मुद्दे पर एक समन्वित राजनीतिक प्रतिक्रिया पर चर्चा की ।
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