
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी संघर्ष के बीच ओमान के तट के पास समुद्र में हुए बड़े तेल रिसाव (Oil spill) ने पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक फंसे हुए तेल टैंकर (Oil tanker) से लाखों बैरल कच्चा तेल समुद्र में फैल गया है। सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, तेल का फैलाव 14 अगस्त तक बढ़कर करीब 2,000 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गया। विशेषज्ञों को आशंका है कि अगर रिसाव और फैलता है तो समुद्री जीवों और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान हो सकता है।
शुरुआती सैटेलाइट तस्वीरों में टैंकर से निकला तेल करीब 800 वर्ग किलोमीटर समुद्री क्षेत्र में फैला दिखाई दिया था। लेकिन कुछ ही दिनों में इसका दायरा बढ़कर करीब 2,000 वर्ग किलोमीटर हो गया। रिसाव अब ओमान के तट की ओर भी बढ़ रहा है।
बताया जा रहा है कि जिस समुद्री क्षेत्र में तेल फैला है, वह जैव विविधता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। तेल के समुद्र में फैलने से मछलियों, समुद्री पक्षियों, व्हेल और अन्य जीवों के लिए खतरा पैदा हो गया है।
तेल रिसाव का प्रभाव रास मद्राका के पास करीब 40 किलोमीटर तटीय क्षेत्र और मसीराह द्वीप तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। यह क्षेत्र ओमान के समुद्री नेचर रिजर्व का हिस्सा है और यहां कई महत्वपूर्ण समुद्री प्रजातियां पाई जाती हैं।
इस इलाके को अरेबियन सी हम्पबैक व्हेल और सोकोट्रा कॉर्मोरेंट जैसे वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में कच्चे तेल की मोटी परत समुद्री जीवों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
जिस जहाज से तेल रिसाव हुआ, उसका नाम कैरोलीन बेजेंगी बताया गया है। यह रूसी तेल ले जाने वाला टैंकर है और इस पर करीब 8 से 10 लाख बैरल कच्चा तेल लदा हुआ था। जहाज पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध भी लागू हैं।
जानकारी के मुताबिक, टैंकर 30 जून से ओमान तट के पास फंसा हुआ था। इसके बाद एक द्वीप के नजदीक जहाज से तेल का रिसाव शुरू हुआ। समुद्री सूत्रों के अनुसार, टैंकर ने इससे पहले 8 जून को यमन के पास किसी मुश्किल की सूचना दी थी और ऐसी आशंका जताई गई थी कि वहां किसी तरह का धमाका हुआ हो सकता है।
कैरोलीन बेजेंगी अप्रैल में काला सागर स्थित रूस के नोवोरोसिस्क बंदरगाह से रवाना हुआ था। यह क्षेत्र रूस-यूक्रेन युद्ध के लिहाज से भी संवेदनशील माना जाता है। इसके बाद जहाज मई के आखिर में स्वेज नहर से गुजरते हुए यमन के आसपास के समुद्री क्षेत्र में पहुंचा।
यूक्रेन पहले रूसी तेल ले जाने वाले कथित ‘शैडो फ्लीट’ के जहाजों को निशाना बनाता रहा है और कैरोलीन बेजेंगी को भी इसी तरह के बेड़े का हिस्सा बताया जा रहा है। जहाज की यात्रा के दौरान वह दो अलग-अलग संघर्ष क्षेत्रों से गुजरा।
हालांकि, यमन के पास जहाज के साथ हुई कथित घटना की जिम्मेदारी किसी पक्ष ने नहीं ली है।
तेल रिसाव की सफाई और नुकसान की भरपाई की प्रक्रिया भी आसान नहीं है। बीमा कंपनियों और विश्लेषकों के मुताबिक, युद्ध, प्रतिबंध और समुद्री परिवहन से जुड़े जटिल नियम राहत एवं सफाई अभियान में बाधा पैदा कर रहे हैं।
तेल रिसाव से होने वाले नुकसान के मुआवजे से जुड़ी अंतर-सरकारी संस्था IOPC फंड्स ने बताया कि वह इस घटना की सफाई की लागत में शामिल नहीं होगी। संस्था के अनुसार, इस मामले को सामान्य समुद्री दुर्घटना के बजाय ‘युद्ध की कार्रवाई’ के रूप में देखा जा रहा है।
ओमान के तट के पास फैलता यह तेल रिसाव अब केवल स्थानीय पर्यावरणीय संकट नहीं रह गया है। कुछ ही दिनों में तेल का फैलाव 800 से बढ़कर करीब 2,000 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच चुका है। अगर इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो इसका असर बड़े समुद्री और तटीय क्षेत्र पर पड़ सकता है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि तेल उस क्षेत्र में फैल रहा है जो कई दुर्लभ समुद्री प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है। यही वजह है कि इस घटना के दुनिया की बड़ी तेल रिसाव आपदाओं में शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल रिसाव को रोकने और इसके संभावित पर्यावरणीय नुकसान को सीमित करने की चुनौती सबसे बड़ी बनी हुई है।
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