
तीन नंबर की कांग्रेस में मची उथल-पुथल
तीन नंबर विधानसभा से फिर लड़ने का सपना देखने वाले कांग्रेस नेता पिंटू जोशी की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। विधानसभा चुनाव में अभी दो साल बाकी है, लेकिन जिस तरह से उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी अश्विन जोशी हुआ करते थे, उनकी जगह अब उनकी पत्नी और बेटे ने ले ली है। 14 अगस्त को राजबाड़ा पर हुए कार्यक्रम में जोशी के समर्थकों के साथ-साथ कार्यक्रम की कमान उनके बेटे आदित्य उर्फ बिट्टू जोशी और पत्नी मनप्रीत ने संभाली और जिस तरह से आयोजन हुआ, उसको देखकर लग रहा हैकि अश्विन जोशी का परिवार अभी भी तीन नंबर विधानसभा से बाहर नहीं जाना चाहता है। इसके पहले हुई प्रेस कान्फ्रेंस में भी तीन नंबर के झंडाबरदार बड़ी संख्या में नजर आए थे और उनको शहर कांग्रेस के नेताओं ने ताकत दी थी। अब पिंटू के लिए एक बार फिर तीन नंबर उतना आसान नहीं है, जितना वे समझते आ रहे थे और बड़ी बात नहीं कि अश्विन जोशी का परिवार टिकट भी मांग ले।
जीतू पर कृपा कहां अटकी है?
भाजपा पार्षद जीतू यादव अभी भी नगर निगम से बाहर होकर निर्वासित का जीवन जी रहे हैं। जीतू अपने क्षेत्र में तो सक्रिय हैं और दो नंबरी दरबार में अभी भी उनका रूतबा कायम है, लेकिन जीतू पर किसी की कृपा नहीं हो पा रही है। यानी उनका वनवास खत्म नहीं हो रहा है न ही इसकी पहल होती दिखाई दे रही है। अब अगले साल चुनाव है और उसके पहले नहीं लगता कि जीतू को उसी स्थान पर पहुंचा दिया जाए, जहां से उन्हें कालरा विवाद के चलते हटाया गया था।
कलेक्टर कार्यालय में पता नहीं,कौन है भाजपा अध्यक्ष
कलेक्टर कार्यालय के कारिंदों को नहीं मालूम है कि भाजपा का जिलाध्यक्ष कौन है। स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह के लिए जब कलेक्टर कार्यालय के कर्मचारी भाजपा कार्यालय पहुंचे और अशोक सोमानी को ढूंढने लगे तो यह बात सामने आई। सोमानी को निमंत्रण पत्र में जिलाध्यक्ष लिखा गया था और उनकी पूरी कार्यकारिणी के नाम भी थे, जबकि सोमानी के बाद कई अध्यक्ष बदल चुके हैं। कार्यालय में बैठे रामविलास पटेल और मुकेश जरिया ने जब कलेक्टर कर्मचारी से पूछा कि अब तो नए अध्यक्ष श्रवण चावड़ा है, फिर आपका रिकार्ड में अभी तक सोमानी का नाम क्यों चढ़ा है? कर्मचारी ने तुरंत कार्ड का एक बंडल आगे कर दिया, जिसमें चावड़ा और उनकी कार्यकारिणी के नाम थे।
राऊ से फिर उम्मीद लगा बैठे हैं जीतू जिराती
एक तरह से भाजपा की सक्रिय राजनीति से बाहर बैठे जीतू जिराती को अभी तक कोई बड़ा पद नहीं मिला है तो उन्होंने फिर अपनी पुरानी विधानसभा की ओर उम्मीदों से देखना शुरू कर दिया है, जहां से अभी मधु वर्मा विधायक हैं। पिछले दिनों राऊ विधानसभा में निकली तिरंगा यात्रा में जीतू के समर्थकों की संख्या ज्यादा थीं और यह दूसरे धड़े को असहज होने के लिए काफी थी। जीतू न केवल पूरे समय यात्रा में रहे, बल्कि अपने गीतों से लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। वैसे जीतू ने बता दिया कि राऊ विधानसभा में अभी भी उनके चाहने वालों की कमी नहीं है। जीतू के नजदीकियों का भी कहना है कि भैया लौटकर फिर आ सकते हैं या उन्हें फिर से अपनी विधानसभा से लड़ने का पुरस्कार मिल सकता है, क्योंाकि पिछले कई चुनावों में वे पार्टी की मंशा पर खरे उतरे हैं।
पिंटू और चिंटू में दूरी फायदा ले रहे कांग्रेसी
पिंटू और चिंटू के बीच जीतू पटवारी के घर हुई नोकझोंक की अभी भी कांग्रेस में चर्चा है और इसका फायदा वे नेता उठाने में लगे हैं, जो इनको दूर ही देखना चाहते हैं। चिंटू विरोधी कार्यकर्ताओं को पिंटू के आसपास देखा जा रहा है तो पिंटू विरोधियों को चिंटू से नजदीकियां बढ़ाते हुए देखा जा सकता है। यह कांग्रेस की नई परिपाटी नहीं है, बल्कि कहे कि पुरानी परंपरा है, जिसमें सारे कांग्रेसी एक जाजम पर जमा नहीं हो सकते। खैर अब तो ये समय बताएगा कि चिंटू और पिंटू की ये अदावत कब तक कायम रहती है या फिर ये भी पॉलिटिक्स के रंग में रंगा जाती है?
थक गए थे इसलिए कि औपचारिकता
एक दिन पहले तिरंगा रैली में भाजपा के नेताओं ने जोरदार माहौल जमाया और जेन जी के बीच रैली निकालकर बताया कि युवा भी उनके साथ हैं, लेकिन दूसरे दिन भारत के विभाजन की त्रासदी को लेकर रैली निकालना थी। नेताओं के पैरों में ताकत नहीं बची थी, सो उन्होंने रैली का मार्ग इतना छोटा कर दिया कि यह रैली मात्र एक औपचारिकता ही साबित हुई। डेंटल कॉलेज से लेकर भाजपा कार्यालय तक रैली निकाली गई, जो बमुश्किल आधा किलोमीटर भी नहीं चली। और तो और जो नेता त्रासदी मनाने आए थे, वे कार्यालय में हंसी-ठिठोली करते नजर आए।
स्वागत-सम्मान में मिली सामग्री का सदुपयोग
आमतौर पर नेताओं के स्वागत-सम्मान में मिली सामग्री को या तो नेता वहीं छोड़ देते हैं या अपने कार्यकर्ताओं को दे देते हैं, लेकिन इन सामग्री का सदुपयोग कैसे हो, इसको लेकर प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे ने नई पहल की है। उन्होंने अपने स्वागत-सम्मान के दौरान पहनाई जाने वाली पगड़ी और साफे इक_ा कर बच्चों के लिए कपड़े बनवाए हैं, जिन्हें गरीब बच्चों को बांटा जा रहा है। पहला दौर समाप्त हो चुका है और अब दूसरे दौर में उन गरीब बच्चों को चिन्हित किया जा रहा है, जिन्हें कपड़ों की आवश्यकता है।
15 अगस्त और वंदे मातरम के जोश में भाजपा इस बार अपने वरिष्ठ नेता अटलबिहारी वाजपेयी को भूल ही गई। कल वाजपेयी की पुण्यतिथि थी, लेकिन भाजपा की ओर से आदरांजलि देने के लिए कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया। एक समय था, जब अटलजी के नाम पर ही भाजपा ने अपनी केन्द्र में सरकार बनाई थी, लेकिन उनके जाने के बाद वे उन्हें ही भूलते से नजर आ रहे हैं।
-संजीव मालवीय
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