
सवाल ये है कि क्या जेल में बंद कैदी भी नशीले पदार्थों का करते रहे हैं सेवन
इंदौर। जेलों (Prisons) में बंद कैदियों (Prisoners) के पास कई तरह की सुविधाएं पहुंचती रहती हैं। उसमें लगता है नशीले पदार्थ (Narcotic substances) भी शामिल रहते हैं। यही कारण है कि सेंट्रल जेल (Central Jail) में कल लगाए गए नशामुक्ति शिविर में 80 कैदियों को नशे से बचने का संकल्प दिलाया गया। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय रामबाग द्वारा जेल में यह नशामुक्ति कार्यक्रम आयोजित किया गया। अब सवाल यह है कि जो कैदी जेल में बंद हैं वे नशा कैसे करेंगे। क्या उन्हें जेल में नशीले पदार्थ आसानी से उपलब्ध होते रहे हैं और अगर पुराने नशेबाज भी हैं तो इतने समय तक कैद में रहने के दौरान आदत वैसे ही छूट जाती है।
उक्त नशामुक्ति कार्यक्रम में सदस्यों द्वारा नशामुक्त जीवन जीने हेतु बंदियों को प्रोत्साहित किया गया। नशामुक्ति महाअभियान के तहत बंदियों को संकल्प दिलाया गया। कार्यक्रम में कुल 80 बंदियों द्वारा सहभागिता की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों को नशामुक्त जीवन, निरोगी काया, स्वस्थ जीवनयापन करने हेतु प्रोत्साहित करना था। उक्त कार्यक्रम के माध्यम से बंदियों को सकारात्मक जीवनशैली अपनाने तथा समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रेरित करने हेतु बंदियों द्वारा नशामुक्ति की प्रतिज्ञा ली गई। कार्यक्रम का आयोजन केन्द्रीय जेल अधीक्षक दिनेश नरगावे के मार्गदर्शन एवं उपजेल अधीक्षक इंदरसिंह नागर, वरिष्ठ परिवीक्षा अभिषेक दांगी एवं कल्याण अधिकारी सोनम बंडोरे, सहायक जेल अधीक्षक की उपस्थिति में किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय से ब्रह्माकुमारी छाया तथा चंद्रकला, संतोष विंचूरकर, संतोष कुमार सम्मिलित हुए। उल्लेखनीय है कि इंदौर सहित देशभर की जेलें इसलिए भी बदनाम रहती हैं कि वहां रसूखदार और पैसे वाले कैदियों को सभी तरह की सुख-सुविधाएं मुहैया हो जाती हैं। अच्छे भोजन के साथ-साथ सिगरेट, तम्बाकू के अलावा शराब सहित अन्य नशीले पदार्थ भी मिल जाते हैं और इस तरह के कई मामले पकड़े भी जा चुके हैं। समय-समय पर हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जेलों की जांच भी इस तरह के आरोपों के चलते कराई जाती रही है।
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