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कांग्रेस के बड़े नेताओं से क्यों खफा हुए मल्लिकार्जुन खरगे? CWC बैठक में शुद्धिकरण विवाद पर उठाया मुद्दा

August 20, 2026

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष(Congress President) मल्लिकार्जुन खरगे(Mallikarjun Kharge)ने हल्द्वानी में उनकी रैली के बाद सामने आए कथित शुद्धिकरण विवाद को लेकर पार्टी के भीतर ही कुछ नेताओं की चुप्पी पर नाराजगी जताई है। बुधवार को हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC की बैठक में खरगे ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि कई सदस्य खुलकर उनके समर्थन में सामने नहीं आए और उन्होंने इस घटना की निंदा नहीं की। खास तौर पर उन्होंने उन नेताओं का जिक्र किया जो लगातार मीडिया में सक्रिय रहते हैं। हालांकि खरगे ने किसी नेता का नाम नहीं लिया है। इस घटनाक्रम की जानकारी बैठक में मौजूद नेताओं के हवाले से सामने आई है और कांग्रेस की ओर से खरगे की निजी प्रतिक्रिया को लेकर कोई अलग आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

दरअसल यह पूरा विवाद उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान से जुड़ा है। 8 अगस्त को खरगे ने यहां एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया था। इसके बाद वहां कथित तौर पर शुद्धिकरण अनुष्ठान किए जाने की खबर सामने आई। कांग्रेस ने इस घटना को जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए इसकी आलोचना की और आरोप लगाया कि आयोजन से जुड़े लोगों का बीजेपी से संबंध है। दूसरी तरफ बीजेपी ने इस आयोजन से दूरी बनाई और पार्टी के स्तर पर किसी तरह की भूमिका से इनकार किया। मामले ने धीरे धीरे राजनीतिक रंग ले लिया और अब यह मुद्दा संसद से लेकर कांग्रेस की CWC बैठक तक पहुंच गया है।

खरगे पहले ही राज्यसभा में इस मुद्दे को उठा चुके हैं। उन्होंने सदन में कहा था कि रैली के बाद मंच का शुद्धिकरण किया जाना उन्हें बेहद अपमानजनक लगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह दलित समुदाय से आते हैं लेकिन उन्होंने कभी किसी से अपने लिए विशेष संरक्षण की मांग नहीं की। उनके मुताबिक इस घटना ने उन्हें छुआछूत के दर्द का एहसास कराया। खरगे ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई थी।

CWC की बैठक में खरगे की नाराजगी सामने आने के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पार्टी का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस घटना का मुद्दा उठाया था और इसकी निंदा भी की थी। उनके मुताबिक कार्य समिति ने इस घटना को अस्वीकार्य और निंदनीय माना है। हालांकि बैठक में खरगे ने यह भी संकेत दिया कि कुछ नेता ऐसे हैं जो पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग बयान देते हैं और लेख भी लिखते हैं। इस टिप्पणी को पार्टी के भीतर चल रही असहजता से जोड़कर देखा जा रहा है।

विवाद के दूसरे पक्ष में बीजेपी ने भी मामले की जांच का भरोसा दिया है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यसभा में घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि बीजेपी इस तरह की गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। उन्होंने जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। यानी एक तरफ कांग्रेस इस घटना को सामाजिक और जातिगत सम्मान से जोड़कर देख रही है तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे पार्टी से जोड़ने के आरोपों से इनकार करते हुए जांच की बात कर रही है।


  • इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा अब खरगे की अपनी पार्टी के नेताओं से अपेक्षा को लेकर हो रही है। CWC जैसी शीर्ष बैठक में उन्होंने जिस तरह अपनी नाराजगी और दुख जाहिर किया है उससे साफ है कि हल्द्वानी का विवाद कांग्रेस के लिए केवल बीजेपी पर हमला करने का मुद्दा नहीं रहा बल्कि पार्टी के भीतर भी चर्चा का विषय बन चुका है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि खरगे की टिप्पणी से किन नेताओं की ओर संकेत था। इसलिए बिना नाम सामने आए किसी नेता को उनकी नाराजगी का जिम्मेदार बताना उचित नहीं होगा। फिलहाल हल्द्वानी का यह विवाद जाति सम्मान राजनीतिक बयानबाजी और दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप के कारण लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

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