लाहौर। पाकिस्तान में सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर (Asim Munir) की बढ़ती शक्तियों को लेकर सैन्य प्रतिष्ठान के भीतर असंतोष की चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच रावलपिंडी (Rawalpindi) में सेना मुख्यालय (Army Headquarters) के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। गृह मंत्रालय ने यहां सेना की तीन कंपनियों की तैनाती को मंजूरी दी है, जो अगले छह महीने तक सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगी।
सरकार की ओर से इस तैनाती को नागरिक प्रशासन की सहायता और संभावित सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की सामान्य प्रक्रिया बताया गया है। हालांकि, सूत्रों का दावा है कि सेना के निचले और जूनियर रैंक में मुनीर को मिली व्यापक शक्तियों को लेकर बेचैनी बढ़ रही है।
रावलपिंडी में अतिरिक्त सैन्य बलों की तैनाती संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत की गई है। यह प्रावधान नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए सशस्त्र बलों की तैनाती की अनुमति देता है।
रावलपिंडी इसलिए भी बेहद संवेदनशील माना जाता है क्योंकि यहीं पाकिस्तान सेना का मुख्यालय स्थित है। इसके अलावा अडियाला जेल भी इसी शहर में है, जहां पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई संस्थापक इमरान खान बंद हैं।
मुनीर को मिली शक्तियों पर सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में हालिया संवैधानिक और रक्षा संबंधी बदलावों के बाद आसिम मुनीर की शक्तियां काफी बढ़ गई हैं। दावा है कि नए ढांचे में उन्हें थलसेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़े मामलों में व्यापक अधिकार हासिल हुए हैं।
इन बदलावों के तहत सैन्य अधिकारियों और जवानों की नियुक्ति, सेवा समाप्ति या जबरन रिटायरमेंट जैसे मामलों में भी सेना प्रमुख की भूमिका मजबूत हुई है। इसी वजह से जूनियर अधिकारियों के बीच असंतोष की अटकलें लगाई जा रही हैं।
हालांकि, सेना के भीतर बगावत या व्यापक असंतोष की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन दावों को फिलहाल रिपोर्टों और सूत्रों के हवाले से ही देखा जाना चाहिए।
2030 तक पद पर बने रहने की चर्चा
हालिया बदलावों को लेकर यह भी दावा किया जा रहा है कि आसिम मुनीर के लंबे समय तक सेना प्रमुख के पद पर बने रहने का रास्ता साफ हुआ है। उन्हें कानूनी सुरक्षा और अभियोजन से छूट मिलने की चर्चाओं ने भी पाकिस्तान की राजनीति और सैन्य प्रतिष्ठान में बहस को बढ़ाया है।
आलोचकों का कहना है कि सत्ता और सैन्य नेतृत्व के इतने अधिक केंद्रीकरण से सेना के भीतर असहमति के लिए जगह कम हो सकती है। वहीं समर्थकों का तर्क है कि इससे सैन्य कमान में स्थिरता आएगी।
सुरक्षा बलों पर हमले के बाद सतर्कता
रावलपिंडी में सुरक्षा बढ़ाने का फैसला ऐसे समय हुआ है जब कुछ दिन पहले मॉल रोड इलाके में सुरक्षा बलों पर हमला हुआ था। जवाबी कार्रवाई में एक संदिग्ध मारा गया था। सरकारी हलकों में इस घटना को इमरान खान की पार्टी पीटीआई से जोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन पार्टी ने इस आरोप को खारिज कर दिया।
इसके अलावा अडियाला जेल में बंद इमरान खान की सेहत को लेकर भी लगातार चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में प्रशासन रावलपिंडी में किसी भी संभावित विरोध या अप्रिय घटना से निपटने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था कर रहा है।
क्या सेना में वाकई बढ़ रहा है असंतोष?
मुनीर के खिलाफ सैन्य अधिकारियों में असंतोष और संभावित बगावत की आशंका संबंधी दावे फिलहाल सूत्रों पर आधारित हैं। तीन सैन्य कंपनियों की तैनाती को सीधे तौर पर सेना प्रमुख के खिलाफ विद्रोह से जोड़ना भी जल्दबाजी होगी।
फिलहाल इतना जरूर है कि रावलपिंडी में अतिरिक्त सैन्य तैनाती, सेना प्रमुख के बढ़े अधिकार और इमरान खान की मौजूदगी ने पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य माहौल को एक बार फिर संवेदनशील बना दिया है।
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