नई दिल्ली। दुनिया को आने वाले वर्षों में एक और भीषण गर्मी (Scorching heat) का सामना करना पड़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों (Meteorologists) के अनुमान के मुताबिक प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा El Niño असामान्य रूप से मजबूत हो सकता है। अगर मौजूदा पूर्वानुमान सही साबित हुए तो यह 19वीं सदी के बाद दर्ज किए गए सबसे शक्तिशाली El Niño घटनाक्रमों में शामिल हो सकता है।
इसका सीधा असर वैश्विक तापमान पर पड़ने की आशंका है। वैज्ञानिकों के मुताबिक 2026 या 2027 दुनिया का सबसे गर्म साल बनने की दौड़ में आगे निकल सकते हैं।
El Niño एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री पानी सामान्य से काफी ज्यादा गर्म हो जाता है। समुद्र के गर्म होने से वातावरण में अतिरिक्त ऊष्मा पहुंचती है और हवा, बारिश तथा तापमान के सामान्य पैटर्न में बदलाव आने लगता है।
इस बार पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से करीब 3 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा पहुंचने का अनुमान जताया जा रहा है। सामान्य तौर पर मजबूत El Niño के दौरान यह बढ़ोतरी करीब 1 से 2 डिग्री सेल्सियस मानी जाती है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस ऊपर चला जाए तो भी उसे बेहद मजबूत El Niño माना जाता है। ऐसे में करीब 3 डिग्री की संभावित बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ा दी है।
इससे पहले 1982-83, 1997-98 और 2015-16 में बेहद मजबूत El Niño दर्ज किए गए थे। ब्रिटेन के मौसम विभाग के वैज्ञानिक Adam Scaife के मुताबिक उनके पूर्वानुमानों में इससे पहले इतना मजबूत El Niño संकेत देखने को नहीं मिला।
El Niño का प्रभाव पूरी दुनिया में एक जैसा नहीं होता। कहीं इससे अत्यधिक बारिश और बाढ़ की स्थिति बन सकती है, तो कहीं सूखे और भीषण गर्मी का खतरा बढ़ सकता है।
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता मानसून को लेकर है। मजबूत El Niño को अक्सर भारत में कमजोर मानसून की परिस्थितियों से जोड़ा जाता है। हालांकि इसका असर हर बार समान नहीं होता, इसलिए मानसून के शुरुआती पूर्वानुमानों पर भी नजर रहेगी।
अगर El Niño लंबे समय तक मजबूत रहा तो भारत में बारिश के वितरण, कृषि और तापमान पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मजबूत El Niño के कारण वैश्विक औसत तापमान में एक और उछाल आ सकता है। 2026 सबसे गर्म साल बनने की संभावना रखता है, लेकिन 2027 के लिए भी खतरा कम नहीं है।
इसकी एक वजह यह है कि El Niño के दौरान समुद्र में जमा हुई अतिरिक्त गर्मी का पूरा प्रभाव धरती के औसत तापमान पर तत्काल नहीं, बल्कि कुछ समय बाद दिखाई दे सकता है।
1998 और 2016 जैसे वर्षों में मजबूत El Niño के दौरान वैश्विक तापमान के रिकॉर्ड टूटे थे। लेकिन मौजूदा स्थिति पहले से अलग है। जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी का औसत तापमान पहले ही ऐतिहासिक स्तरों के मुकाबले काफी बढ़ चुका है।
ऐसे में अगर शक्तिशाली El Niño विकसित होता है तो वह पहले से गर्म हो चुकी धरती को और तपाने का काम कर सकता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2027 में वैश्विक तापमान कुछ समय के लिए औद्योगिक-पूर्व स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक ऊपर रह सकता है।
यानी आने वाले महीनों में El Niño पर दुनिया की नजर इसलिए टिकी है क्योंकि यह सिर्फ समुद्र के तापमान में बदलाव नहीं, बल्कि गर्मी, बारिश, मानसून और वैश्विक जलवायु के नए रिकॉर्ड से जुड़ा घटनाक्रम बन सकता है।
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