
नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के पूर्व फ्लाइंग ट्रेनिंग निदेशक कैप्टन अनिल गिल और विमानन क्षेत्र से जुड़ी चार कंपनियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोप में मामला दर्ज किया है। सीबीआई की एफआईआर में चुनिंदा फ्लाइंग ट्रेनिंग संगठनों को कथित तौर पर अनुचित फायदा पहुंचाने, विमान खरीद में गड़बड़ी और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के आरोप लगाए गए हैं। मामले में ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड, रेडबर्ड एविएशन अकादमी प्राइवेट लिमिटेड, सबर्स कॉरपोरेट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और सैंडहिल्स एविएशन IFSC प्राइवेट लिमिटेड को भी आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। आरोपियों की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, जांच में ऐसी कंपनियों का एक कथित नेटवर्क सामने आया, जिसे अनिल गिल के करीबी और परिवार के लोग चलाते थे। आरोप है कि ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल कंपनी 2016 में गिल की मां और मामी को निदेशक बनाकर शुरू की गई थी। बाद में उनके एक रिश्तेदार और बहनोई की पत्नी भी कंपनी से जुड़ीं। एफआईआर में कहा गया है कि दो अन्य कंपनियां, सबर्स कॉरपोरेट सॉल्यूशंस और सैंडहिल्स एविएशन IFSC भी गिल के रिश्तेदारों को निदेशक बनाकर स्थापित की गई थीं।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि गिल ने अपने पद का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए कुछ फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थानों को फायदा पहुंचाया। आरोप है कि उनके करीबी रिश्तेदारों द्वारा नियंत्रित कथित बेनामी या शेल कंपनियों के जरिए ट्रेनिंग विमान बेहद कम कीमत पर खरीदे गए और बाद में इन्हीं विमानों को पसंदीदा फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थानों को काफी ऊंची दरों पर किराये पर दिया गया।
एफआईआर के मुताबिक, ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल ने 2020 में एक सेसना विमान 10 लाख रुपये में खरीदा था। इसके बाद 2021 में दूसरा विमान 37.5 लाख रुपये में खरीदा गया। सीबीआई का आरोप है कि दूसरा विमान पूरी तरह चालू स्थिति में था और उसके इंजन ने केवल 123 घंटे काम किया था। इसके बावजूद उसे कथित तौर पर 75 लाख से एक करोड़ रुपये की अनुमानित बाजार कीमत के मुकाबले काफी कम दाम में खरीदा गया। दोनों विमानों को बाद में रेडबर्ड एविएशन अकादमी को लीज पर दिया गया। एफआईआर के अनुसार, 2021 से अक्तूबर 2023 के बीच ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल ने केवल रेडबर्ड से 2.16 करोड़ रुपये से अधिक का लीज किराया हासिल किया।
सीबीआई ने नियामकीय प्रक्रिया में भी कथित पक्षपात का आरोप लगाया है। एफआईआर के मुताबिक, रेडबर्ड एविएशन अकादमी को शुरुआती मंजूरी करीब एक महीने और तीन दिन में मिल गई। इसमें कमियों को दूर करने में लगा समय शामिल नहीं था। इसके मुकाबले प्रतिस्पर्धी कंपनियों स्काइनेक्स एयरो और जेट सर्व एविएशन को मंजूरी मिलने में चार से छह महीने लगे। सीबीआई ने इसे कथित पक्षपात और प्रक्रिया में अनियमितता का संकेत बताया है। आरोप है कि गिल ने रेडबर्ड की ट्रेनिंग और प्रक्रिया संबंधी मैनुअल को उसकी आधिकारिक स्वीकृति की तारीख से पहले ही मंजूरी दे दी। वहीं, प्रतिस्पर्धी कंपनी GATI की ओर से विमान को शामिल करने के लिए दिए गए आवेदन को कथित तौर पर बिना कारण दर्ज किए लंबित रखा गया।
एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि सितंबर 2022 में गिल ने एक चयन समिति की अध्यक्षता की थी, जिसने उनके रिश्तेदार विकास नैन को डिप्टी चीफ फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर नियुक्त किया। बाद में नैन को रेडबर्ड एविएशन अकादमी में करीब 6.5 लाख रुपये प्रति माह के वेतन पर नौकरी मिली। सीबीआई ने गिल पर अपने करीबी रिश्तेदारों की विमानन क्षेत्र में भागीदारी और रोजगार की जानकारी नहीं देने का भी आरोप लगाया है। एजेंसी के मुताबिक, यह DoPT के अनिवार्य आचरण नियमों और डीजीसीए के निर्देशों का उल्लंघन हो सकता है।
जांच एजेंसी ने सबर्स कॉरपोरेट सॉल्यूशंस और सैंडहिल्स एविएशन IFSC से जुड़े वित्तीय लेनदेन पर भी सवाल उठाए हैं। एफआईआर के अनुसार, इन कंपनियों का इस्तेमाल फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थानों को किराये पर दिए गए विमानों के वित्तपोषण और मॉर्गेज से जुड़ी गतिविधियों में किया गया। सीबीआई ने दावा किया है कि बैंक खातों के रिकॉर्ड में ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल और गिल के परिवार के सदस्यों के बीच कई वित्तीय लेनदेन भी सामने आए हैं।
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