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अमेरिका से भारत ले रहा एंटी टैंक मिसाइल जेवलिन, दुश्मन को खोजकर मारने में माहिर

August 28, 2026

नई दिल्ली। भारतीय सेना (Indian Army) के लिए अमेरिका से एंटी टैंक मिसाइल जेवलिन ली जाएगी। भारत में यूएस एंबेसी ने बताया कि भारत ने इसके समझौते पर साइन किए हैं। यूएस एंबेसी ने भारतीय सेना की ओर से जेवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए लेटर ऑफ ऑफर और एक्सेप्टेंस (LOA) पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया है। यह खरीद अमेरिका की फॉरेन मिलिट्री सेल्स प्रक्रिया के तहत की जाएगी। भारत सरकार की तरफ से अभी इस समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

रक्षा क्षेत्र में नए अवसरों पर होगी बातचीत
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि यह समझौता दिखाता है कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी लगातार गहरी, मजबूत और महत्वपूर्ण होती जा रही है। जेवलिन समझौता भारतीय सेना के लिए अमेरिका के मजबूत सपोर्ट को दर्शाता है और दोनों देशों की रक्षा कंपनियों के लिए मिलकर काम करने के नए अवसर पैदा करता है। अमेरिका दूतावास ने कहा कि इस समझौते के बाद भारत और अमेरिका आपसी फायदे वाले संयुक्त उत्पादन और दोनों देशों के रक्षा उद्योगों को और मजबूत करने के दूसरे अवसरों पर भी बातचीत कर सकेंगे।


  • क्या है जेवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम?
    जेवलिन एक आधुनिक, मध्यम दूरी की ‘फायर एंड फॉरगेट’ एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है। यानी मिसाइल दागने के बाद सैनिक को उसे लगातार दिशा देने की जरूरत नहीं होती। मिसाइल में लगा इन्फ्रारेड सीकर खुद लक्ष्य को पहचानकर उसका पीछा करता है।

    जेवलिन मिसाइल सिस्टम की ताकत समझिए
    इसका इस्तेमाल अमेरिकी सेना, अमेरिकी मरीन कोर और कई अन्य देशों की सेनाएं करती हैं। इसे बख्तरबंद वाहनों और मजबूत किलेबंद ठिकानों समेत कई तरह के लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। जेवलिन मिसाइल सिस्टम का उत्पादन जेवलिन जॉइंट वेंचर करता है। यह अमेरिकी रक्षा कंपनियों RTX और लॉकहीड मार्टिन की साझेदारी है। यह कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल है जो आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाई जा सकती है। हाल ही में रूस-यूक्रेन युद्ध में भी यूक्रेनी सेना ने रूसी टैंकों के खिलाफ इसका इस्तेमाल किया है।

    100 से ज्यादा मिसाइलों की डील पक्की
    सूत्रों का कहना है कि अभी ये डील 100 से ज्यादा मिसाइल के लिए है। भारत और अमेरिका मिलकर भारत में इस मिसाइल के बड़े पैमाने पर संयुक्त उत्पादन की योजना पर भी काम कर रहे हैं। अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (DSCA) ने पिछले साल नवंबर में अमेरिकी कांग्रेस को भारत को जेवलिन मिसाइल सिस्टम और उससे जुड़े उपकरणों की संभावित विदेशी सैन्य बिक्री के बारे में जानकारी दी थी। इसकी अनुमानित कीमत 45.7 मिलियन डॉलर बताई गई थी।

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