
प्राधिकरण एनओसी ना मिलने के चलते नगर तथा ग्राम निवेश ने रोक रखी है अभिन्यास मंजूरी
अब जमीन मालिकों ने हाईकोर्ट में दायर की कई याचिकाएं
इंदौर। प्राधिकरण (IDA) की कार्यप्रणाली बीते एक साल से नई योजनाओं (New schemes) को लेकर ठप पड़ी है। वर्तमान में संचालित टीपीएस योजनाओं (TPS schemes) में भी धीमी गति से काम चल रहा है, तो किसानों (Farmers) के विरोध के चलते खंडवा रोड पर प्रस्तावित टीपीएस-11, 12 और 13 भी अधर में लटकी है। इसमें आवासीय, थोक वाणिज्यिक मंडी और मार्ग के लिए ये योजनाएं प्रस्तावित की गई थी। इसके साथ ही लगभग 3 हजार एकड़ की अहिल्या पथ से जुड़ी 5 टीपीएस योजनाएं भी फाइलों में बंद पड़ी है और दूसरी तरफ इनके जमीन मालिकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर रखी है।
इंदौर के मास्टर प्लान के अते-पते नहीं हैं, जिसके चलते 79 गांवों में विकास अनुमति नहीं मिल पा रही है, तो दूसरी तरफ प्राधिकरण कागजों पर ही प्रस्तावित 4 हजार एकड़ से अधिक जमीनों पर 8 टीपीएस योजनाएं अधर में पड़ी है। चूंकि प्राधिकरण इन योजनाओं को प्रस्तावित कर चुका है, लिहाजा वह इनमें शामिल जमीनों पर एनओसी जारी नहीं करता है, जिसके चलते नगर तथा ग्राम निवेश अभिन्यास की मंजूरी नहीं दे पाता और उसके बाद विकास अनुमति तक भी फाइलें नहीं पहुंच पाती है। अहिल्या पथ में ही 5 टीपीएस योजनाएं शामिल हैं, जिसमें लगभग 3 हजार एकड़ जमीन शामिल है। 15 किलोमीटर लम्बे और 75 मीटर चौड़े अहिल्या पथ का निर्माण प्राधिकरण ने तय किया, क्योंकि यह मास्टर प्लान का महत्वपूर्ण रोड है, जो इंदौर-पीथमपुर इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर से जुड़ते हुए एयरपोर्ट से उज्जैन रोड तक निर्मित होना है। इसके लिए प्राधिकरण बोर्ड ने मंजूरी भी ले ली और 1170 हेक्टेयर यानी लगभग 3 हजार एकड़ पर 5 टीपीएस योजना नैनोद, रिजलाय, जम्बूड़ी हब्सी, बुड़ानिया, बड़ा बांगड़दा, पालाखेड़ी, लिम्बोदागारी, भौंरासला, रेवती और बरदरी की जमीनों पर घोषित कर दी। 79 अभिन्यास पूर्व के इनसे जुड़ी जमीनों पर मंजूर हो चुके हैं। इसी तरह तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने किसानों के विरोध के चलते टीपीएस-11, 12 और 13 पर भी अमल रूकवाया था। मगर इन सभी 8 टीपीएस योजनाओं को शासन ने भी अधर में लटका रखा है और जमीन मालिक परेशान हैं।
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