
इंदौर. राखी का त्योहार (festival of Rakhi) है. भाई की कलाई पर बहन (Sister) राखी बांधती है. मिठाई खिलाती है. भाई शगुन देता है. इंदौर (Indore) में इस बार रक्षाबंधन पर अनोखी राखी चर्चा में है. ये कोई छोटी-मोटी राखी नहीं है. 40×40 इंच (40-inch) की विशाल राखी. इसे किसी भाई की कलाई पर नहीं, बल्कि इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश (Khajrana Ganesh) मंदिर में भगवान गणेश को अर्पित किया गया है.
राखी को खास तौर पर तैयार किया गया है और इसकी थीम भी बेहद खास रखी गई है. इसमें सिर्फ रक्षाबंधन का संदेश नहीं, बल्कि देश की संस्कृति, शक्ति, समृद्धि और विकास की झलक दिखाई गई है. अब जरा इस राखी को ध्यान से समझिए. इसमें मां काली की आकृति बनाई गई है, जो शक्ति का प्रतीक हैं. इसके साथ धन और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी और बुद्धि की देवी मां सरस्वती भी हैं.
राखी में महाकाल और भगवान जगन्नाथ की आकृतियां भी हैं. यानी एक राखी में देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को समेटने की कोशिश की गई है. इस बार इसमें एक खास संदेश भी जोड़ा गया है. राखी पर वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर को भी शामिल किया गया है.
राखी के जरिए देश की एकता, शक्ति और समृद्धि की कामना की गई है. साथ ही भगवान गणेश से प्रार्थना की गई कि भारत दुनिया के मंच पर एक विकसित और शक्तिशाली राष्ट्र के तौर पर अपनी पहचान को और मजबूत करे.
ये पहली बार नहीं है जब खजराना गणेश को ऐसी खास राखी अर्पित की गई हो. इंदौर का पालरेचा परिवार पिछले 24 साल से रक्षाबंधन पर भगवान खजराना गणेश को विशेष राखी अर्पित करता आ रहा है. यानी दो दशक से ज्यादा समय से परिवार ने इस परंपरा को बनाए रखा है. हर साल राखी तैयार होती है, भगवान गणेश को अर्पित की जाती है और इस पर अलग-अलग संदेशों के जरिए देश और समाज के लिए मंगलकामना की जाती है.
इस बार 40×40 इंच की विशाल राखी में धार्मिक प्रतीकों के साथ राष्ट्रभावना को भी प्रमुखता दी गई. रक्षाबंधन के दिन इस विशाल राखी को खजराना गणेश मंदिर लाया गया. विधि-विधान के साथ भगवान गणेश को राखी समर्पित की गई. मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी ये राखी आकर्षण का केंद्र बनी.
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