
– किसान 65 से 70 रुपए लीटर की मांग पर अड़े
– विक्रेता भी लागत बढऩे का दे रहे हवाला
– आज दोनों कर रहे बैठक
इंदौर। हर साल 1 सितंबर को दूध (milk) के दामों (prices) में 2 रुपए तक प्रति लीटर की कमी की उम्मीद रखने वाले उपभोक्ताओं (Consumers) को इस बार झटका लग सकता है। दूध के नए भाव तय करने को लेकर आज उत्पादक किसानों (Producing farmers) और दूध विक्रेता संघ (Milk Vendors’ Association) की अलग-अलग बैठकें हो रही हैं। दोनों पक्ष लागत बढऩे का हवाला देकर दूध के दाम बढ़ाने के पक्ष में हैं।
उज्जैन रोड स्थित विश्वनाथधाम पर किसान शोषण विरोधी मंच के बैनर तले दूध उत्पादक किसानों की बैठक हो रही है। महेंद्रसिंह धनखेड़ी और शेरसिंह का कहना है कि पशु आहार, भूसा और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ी है, लेकिन उसके अनुपात में दूध का भाव नहीं बढ़ा। दिलीपसिंह पवार का कहना है कि किसानों के मुताबिक 70 किलो खली की बोरी, जो पिछले वर्ष करीब 2400 रुपए में मिलती थी, अब 3400 रुपए तक पहुंच गई है। भूसे के दाम में भी 300 से 400 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में दाम 65 से 70 रुपए प्रति लीटर उनको मिलना चाहिए। यही नहीं, 12 से 13 प्रति फेट दाम किए जाने की मांग है।
विक्रेता बढ़ी लागत के पक्ष में
इधर, छावनी क्षेत्र में इंदौर दूध विक्रेता संघ की बैठक आयोजित की गई है। संघ पदाधिकारी भारत मथुरावाला के अनुसार खली और पशु आहार के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे दूध व्यवसाय की लागत भी बढ़ी है। संघ ने व्यवस्था में बिचौलियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आज बैठक में दूध के नए भाव को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
जेब पर होगा सीधा असर
हर साल सितंबर में दूध के भाव में कमी आने से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलती रही है, लेकिन इस बार परिस्थितियां उलट दिखाई दे रही हैं। यदि किसान और विक्रेता संघ की मांगों के मुताबिक भाव बढ़ते हैं तो इसका सीधा असर शहर के लाखों दूध उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। अब निगाहें आज होने वाली दोनों बैठकों के फैसले पर टिकी हैं। वर्तमान में शहरी उपभोक्ताओं को 65 से 70 प्रति लीटर दूध मिल रहा है। अब यह मूल्य किसान चाहते हैं। इस लिहाज से तो 5 से 10 प्रति लीटर दूध के दाम बढ़ाने पड़ेंगे, जो फिलहाल संभव नहीं लगता, लेकिन दाम में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
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