
लखनऊ । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) ने कहा कि राष्ट्र निर्माण के वाहक बनकर (By becoming agents of Nation-Building) युवा देश और समाज के लिए काम करें (Youth should work for the Country and Society) ।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में युवाओं को राष्ट्र निर्माण का वाहक बनने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करना होना चाहिए, जो न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के आदर्शों से प्रेरित होकर देश और समाज के लिए काम करें। उन्होंने कहा कि आज भारत आर्थिक शक्ति के साथ अपनी सभ्यता, संस्कृति और सामर्थ्य पर विश्वास करने वाला राष्ट्र बनकर उभरा है। ‘मेक इन इंडिया’ की सफलता के पीछे ‘बिलीव इन इंडिया’ की भावना है। रक्षा मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा देने के केंद्र नहीं होते, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और बेहतर समाज के निर्माण के केंद्र भी होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज मिलने वाली डिग्री उनकी मंजिल नहीं, बल्कि जीवन में नई संभावनाओं के द्वार खोलने का माध्यम है।
राजनाथ सिंह ने कहा, “शिक्षा के साथ संस्कार न हों, तो ज्ञान अधूरा रह जाता है। संस्कारों के साथ संवेदनशीलता न हो, तो व्यक्तित्व अधूरा रह जाता है। और ज्ञान, संस्कार और संवेदनशीलता के साथ राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव न हो, तो शिक्षा का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।” उन्होंने कहा कि असली शिक्षा व्यक्ति के ‘हेड, हार्ट और हैंड’ तीनों का विकास करती है। सोचने और समझने की क्षमता के साथ व्यावहारिक, व्यावसायिक और समस्या समाधान कौशल का विकास भी जरूरी है। युवा केवल समस्याओं की चर्चा करने वाले नहीं, बल्कि उनके समाधान खोजने वाले बनें। अपनी सफलता को केवल वेतन से नहीं, बल्कि समाज पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव से मापें। रक्षा मंत्री ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अन्याय और भेदभाव के बावजूद हिंसा का रास्ता नहीं चुना, बल्कि शिक्षा को अपना हथियार बनाया।
उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने शिक्षा के साथ चरित्र के महत्व पर भी जोर दिया था। उन्होंने विद्यार्थियों को डॉ. अंबेडकर के तीन शब्दों के मंत्र ‘शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित हो’ की याद दिलाते हुए कहा कि सामाजिक बदलाव केवल संख्या और भीड़ से नहीं आता, बल्कि बड़े संकल्प, ईमानदारी, समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना से आता है। राजनाथ सिंह ने युवाओं से कहा कि क्यों न इसी सभागार से ऐसे युवा निकलें, जो केवल अपने लिए नहीं बल्कि भारत के लिए बड़े सपने देखें। ऐसे युवा तैयार हों जो केवल नौकरी करने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बनें।
रक्षा मंत्री ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय देश में रॉकेट साइकिल और बैलगाड़ी से ले जाए जाते थे, लेकिन आज भारत मंगल तक पहुंच चुका है। देश के सौर मिशन की शुरुआत हो चुकी है और भारत अंतरिक्ष में निजी अंतरिक्ष स्टेशन तथा मानव मिशन की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक समय विदेशी अखबार भारत के अंतरिक्ष अभियानों का मजाक उड़ाते थे, लेकिन आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। आज भारत कुछ बोलता है तो दुनिया ध्यान से सुनती है। भारत अब केवल नियमों का पालन करने वाला देश नहीं, बल्कि नियम बनाने की स्थिति में भी पहुंच गया है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत आज केवल आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हो रहा है, बल्कि अपनी सभ्यता, संस्कृति और क्षमता पर गर्व करने वाला राष्ट्र भी बन रहा है। उन्होंने कहा, “मेक इन इंडिया की सफलता के पीछे बिलीव इन इंडिया की भावना है।” उन्होंने कहा कि नए भारत में युवाओं के भीतर अपनी पहचान, संस्कृति और देश के भविष्य को लेकर विश्वास बढ़ा है। यही आत्मविश्वास भारत को नवाचार, स्टार्टअप, तकनीक और अंतरिक्ष के क्षेत्र में तेजी से आगे ले जा रहा है। आर्थिक शक्ति राष्ट्र को समृद्ध बनाती है, लेकिन सांस्कृतिक आत्मविश्वास उसे महान बनाता है। रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रत्येक युवा को यह याद रखना चाहिए कि वह सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि ‘टीम इंडिया’ के लिए काम कर रहा है और 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य में योगदान दे रहा है।
उन्होंने कहा, “मेरा पक्का विश्वास है कि ऐसे नौजवानों के रहते हुए भारत को दुनिया की सुपरपावर बनने से कोई रोक नहीं सकता।” उन्होंने विद्यार्थियों से सहयोग, टीमवर्क और मिलकर काम करने की संस्कृति अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सहयोग और टीमवर्क प्रगति की गति को कई गुना बढ़ाने वाले कारक हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकसित और आत्मनिर्भर बनने के लिए केवल सकल घरेलू उत्पाद का बढ़ना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि नागरिक अपनी भाषा, संस्कृति, सभ्यता और विरासत पर गर्व करें। भारत को आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और सांस्कृतिक रूप से भी सशक्त बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं, भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के प्रति गौरव की भावना को मजबूत करना नए भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। राजनाथ सिंह ने कहा कि बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के नाम पर यह शैक्षिक संस्थान उनके संसदीय क्षेत्र में है, यह उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने विद्यार्थियों को न्याय, समानता और स्वतंत्रता के मूल्यों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी और दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved