काठमांडू। नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ (great flood) और भूस्खलन (Landslide) ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। प्रभावित इलाकों में अब भी राहत और बचाव अभियान जारी है। मलबे में जिंदगी की तलाश के साथ-साथ बड़ी संख्या में शव भी बरामद किए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, 908 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 3000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
आपदा के बाद हालात इतने गंभीर हैं कि बरामद शवों को सुरक्षित रखने में भी प्रशासन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शव रखने के लिए पर्याप्त फ्रीजर उपलब्ध नहीं होने के कारण करीब 200 अज्ञात शवों को दफनाना पड़ा है।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान में स्थानीय एजेंसियों के साथ भारत की टीमें भी सहयोग कर रही हैं। भारतीय दल मलबे और प्रभावित क्षेत्रों में नेपाल की रेस्क्यू टीम के साथ मिलकर लोगों की तलाश और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।
भारत की ओर से नेपाल को राहत सामग्री भी लगातार भेजी जा रही है। दोनों देशों की एजेंसियां मुश्किल इलाकों तक पहुंचने और फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए अभियान चला रही हैं।
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने रविवार को बताया कि नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब तक 149 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है।
विदेश मंत्रालय ने रविवार शाम करीब साढ़े पांच बजे तक रेस्क्यू किए गए सभी 149 भारतीय नागरिकों की सूची सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की। हालांकि, इसके बावजूद 275 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। लापता भारतीयों की तलाश के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
आपदा प्रभावित क्षेत्रों से लगातार शव मिलने के बाद प्रशासन के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। बड़ी संख्या में शवों को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। फ्रीजर की कमी के कारण करीब 200 अज्ञात शवों को दफनाना पड़ा।
वहीं, कई इलाकों में अभी भी मलबा हटाने और लापता लोगों की तलाश का काम जारी है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों और बाढ़ से क्षतिग्रस्त रास्तों के कारण बचाव टीमों को कई जगह मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
नेपाल की इस भीषण आपदा के बीच कई ऐसी घटनाएं भी सामने आई हैं, जो जिंदगी बचने की उम्मीद जगाती हैं। तबाह हुए गांवों में लोग जब वापस लौट रहे हैं तो उन्हें अपने घर और परिवार की यादें ही नजर आ रही हैं।
ऐसी ही एक घटना में एक स्कूल के छात्र बड़े हादसे की चपेट में आने से बच गए। बताया गया कि छात्र केवल दोपहर का खाना खाने के लिए कक्षा से बाहर गए थे। इसी दौरान स्कूल और आसपास के इलाके में आपदा का असर पड़ा। कुछ मिनटों का यह अंतर छात्रों के लिए जिंदगी और मौत के बीच का फर्क बन गया।
नेपाल में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। हजारों लोगों के लापता होने के कारण बचाव अभियान अभी भी जारी है। मलबे में फंसे लोगों को खोजने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
मौतों का आंकड़ा 900 के पार पहुंचने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, शवों की पहचान और प्रभावित परिवारों को सहायता पहुंचाना है। भारत भी राहत सामग्री और बचाव सहयोग के जरिए नेपाल की मदद में जुटा हुआ है।
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