
जब कुमार विश्वास ने भाजपा पर चुटकी ली
कुमार विश्वास के ऊपर से राजनीति का भूत उतर गया है। इसकी बानगी उस समय देखने को मिली, जब वे सोनकच्छ के नजदीक पुष्पगिरि पर होने वाले आयोजन में वक्ता के बतौर आए। उन्होंने कहा कि कुछ दिन राजनीति के दंगल में भी भटककर लौटा हूं। उन्होंने सोनकच्छ विधायक राजेश सोनकर की ओर इशारा किया तो वे हाथ जोड़ खड़े हो गए। इस पर कुमार विश्वास ने चुटकी ली कि आप हाथ क्यों जोड़ रहे हो, सारा देश भाजपा के हाथ जोड़ता है। वे सोचते हैं कि जनता की सेवा करें। उन्होंने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि पिछली बार इन्हें मध्यप्रदेश में सेवा का अवसर नहीं मिला था, लेकिन इन्होंने तय कर लिया था कि सेवा करना है और फिर ये दूसरे दल के विधायकों को पूछते हैं कि क्या आप ठीक से सेवा कर पा रहे हैं? पूरी नहीं हो पा रही तो ये कहते हैं कि 24 लोग हमारे पास आ जाइए, मिलकर सेवा करेंगे। इस पर खूब ठहाके लगे। इसकी वीडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर खूब चली।
श्रेष्ठा को किसने अध्यक्ष बनवाया?
मंच से सार्वजनिक रूप से प्रदेश के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय का यह कहना कि श्रेष्ठाजी आपने मुझे खूब गालियां पड़वार्इं। बाकी बहनें मुझे गालियां दे रही हैं। अखबार वालों ने लिख दिया कि मैंने आपको अध्यक्ष बनाया। विजयवर्गीय के इस रहस्योद्घाटन के बाद भाजपा में चर्चा चल पड़ी कि आखिर श्रेष्ठा को किसने अध्यक्ष बनवाया। सुमित मिश्रा श्रेष्ठा के पक्ष में नहीं थे तो फिर कहां से जादू की छड़ी घूमी कि श्रेष्ठा ने महिला मोर्चा अध्यक्ष बनकर अपने आपको श्रेष्ठ घोषित कर दिया। अब आप पता लगाते रहो कि कहां से उनकी नियुक्ति हुई, लेकिन मकसद तो हल हो ही गया।
चिंटू और विपिन की जुगलबंदी
चिंटू चौकसे और विपिन वानखेड़े की शहर और जिला कांग्रेस की पिच पर जुगलबंदी तो देखने को मिल ही रही है। दोनों युवा नेता अपने-अपने स्तर पर कांग्रेस को मजबूत करने का प्रयास करने में भी लगे हुए हैं, लेकिन एक अनूठी जुगलबंदी प्रशिक्षण शिविर में भी दिखाई दी। दोनों नेताओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान एक साथ प्रस्तुति दी और एक-दूसरे के सुर में सुर मिलाया। सुनने वाले कह रहे थे कि ये रूप तो आज तक दोनों नेताओं का नहीं दिखा। वैसे बीच-बीच में कुछ बेसुरे नेता दोनों नेताओं के बीच फिट होने की कोशिश करते रहे, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
कम्प्यूटर का नॉलेज नहीं ब्लाक अध्यक्षों को
कांगे्रेस के नेता अभी भी अपनी पुरानी परिपाटी को नहीं छोड़ रहे हैं। एआई के जमाने में कई नेताओं को तो कम्प्यूटर तक चलाना नहीं आ रहा है, जबकि कांग्रेस पार्टी अब अत्याधुनिक होती जा रही है। इसका उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब कांग्रेस के ब्लाक अध्यक्षों को स्वतंत्रता दिवस के झंडावंदन की जानकारी स्टेट कनेक्ट सेंटर को देना थी और फोटो अपलोड करना थे। कुछ ब्लाक अध्यक्षों ने ही ये काम किया और बाकी को समझ नहीं आया कि कैसे फोटो अपलोड किए जाते हैं। भोपाल के नेताओं को जब जानकारी लगी तो उन्होंने एक टेक्निकल एक्सपर्ट को भेजा और ब्लाक अध्यक्षों को ट्रेनिंग दी, लेकिन उसमें भी अधिकांश अध्यक्ष नदारद ही रहे। अब ऐसे पदाधिकारियों के लिए अलग से ट्रेनिंग रखकर उन्हें सिखाया जाए कि जेन जी के युग में यह काम नहीं करोगे तो कांग्रेस को सत्ता में कैसे लाओगे?
हर बार कुछ अलग करने वाले नेता हैं सीटू
भाजपा के एक नेता हैं सीटू छाबड़ा। बिना किसी प्रचार-प्रसार के उनका समाजसेवा करने का एक अलग ही तरीका है। कोरोना काल में उन्होंने जो किया, उससे आज भी कई लोग उनके किस्से सुनाते हैं। उन्होंने लोगों को वो चीजें उपलब्ध कराईं, जिसके लिए वे परेशान हो रहे थे। खुद पीपी किट पहनकर घूमते रहे और लोगों की मदद करते रहे। अब पिछले दिनों उनका एक और रूप देखने को मिला, जब शहर में घूमकर उन्होंने संपेरों को ढूंढा और उनके द्वारा पकड़े गए नागों को जंगल में छुड़वाया, नहीं तो इस बार वन विभाग तो आराम से ही बैठा रहा।
कांग्रेस…आगे-आगे पाट, पीछे सपाट
कांग्रेस का दो दिन का प्रशिक्षण लगा और तीसरे दिन सोशल मीडिया पर अली असगर भोपाल वाला ने पोस्ट वायरल कर दी कि कांग्रेस में एक नेता हैं, जिन्हें अध्यक्ष बनने की सवारी आती है और वे फर्जी संगठन की आड़ में ब्लैकमेलिंग करते हैं और वसूली भी करते हैं। यही नहीं, नेताजी के जितने साथी हैं, उनका भी यही काम है। बस फिर क्या था, नेताजी ने भी अपनी सफाई दे डाली कि अली असगर अनर्गल टिप्पणी कर रहा है, उसे गु्रप से बाहर किया जाए। अब कौन सच्चा है और कौन झूठा ये बात अलग है, लेकिन अनुशासन का पाठ पढऩे वाले कांग्रेसी तो वैसे के वैसे ही रहे।
पहले हां में हां मिलाई, उसके बाद याद आई
रक्षाबंधन के त्योहार के दौरान भाजपा ने शहर में स्वागत रैली निकाली। महू की नेता कविता पाटीदार और दूसरे बड़वानी के नेता गजेन्द्र पटेल की स्वागत रैली में अपनी वाहवाही करवाने के लिए नगर और ग्रामीण संगठन ने बड़ा कार्यक्रम तो रख लिया, लेकिन उस कार्यक्रम की वजह से भाजपा नेताओं की खूब किरकिरी हुई। एक तो शहर ने नेताओं के कारण जाम जैसे हालात झेले और दूसरे वे कार्यकर्ता, जो भूखे-प्यासे नेताओं के इंतजार में खड़े रहे, वे भी चिढऩे लगे। रैली को लेकर जो नेता पहले बड़े नेताओं की हां में हां मिला रहे थे, उन्हें भी विरोध के बाद याद आई कि हमने भी गड़बड़ी कर दी और लोगों को बेवजह परेशान कर दिया।
ओरछा में चल रही भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद इंदौर भाजपा के मामले में कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा ने कुछ बदलाव करने का सोचा है। अगर बदलाव हुआ तो एक बड़ा पद इससे प्रभावित होने की संभावना है।
-संजीव मालवीय
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