
जबलपुर। मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। राज्य शासन ने टेंडर प्रक्रिया से लेकर निर्माण पूरा होने तक के सभी चरणों में अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय कर दी है। अब तक निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की कमी या तकनीकी खामी मिलने पर केवल ठेकेदारों पर जुर्माना या ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई होती थी, लेकिन अब संबंधित इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सीधे तौर पर विभागीय व दंडात्मक कार्रवाई होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि टेंडर दस्तावेजों की तकनीकी जांच, लागत का सही आकलन और तय मापदंडों के अनुसार सामग्री का उपयोग सुनिश्चित कराना फील्ड अफसरों का प्राथमिक दायित्व होगा। यदि सड़क, पुल या किसी भी सरकारी भवन निर्माण में तकनीकी या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है, तो जांच के दायरे में ठेकेदार के साथ साइट इंजीनियर, सब इंजीनियर और कार्यपालन यंत्री भी आएंगे। इससे सरकारी बजट के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होगा।
लापरवाही पर इंजीनियरों पर सीधी विभागीय कार्रवाई होगी
विभाग द्वारा तैयार नई नियमावली के तहत टेंडर जारी करने से पहले होने वाले सर्वे और डीपीआर निर्माण की बारीकी से समीक्षा की जाएगी। यदि गलत डीपीआर बनाकर शासन को वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया या टेंडर की शर्तों में किसी फर्म को अनुचित लाभ देने की कोशिश पाई गई, तो संबंधित तकनीकी टीम इसके लिए सीधे उत्तरदायी होगी। कार्यस्थल पर उपयोग की जाने वाली निर्माण सामग्री के गुणवत्ता परीक्षण के प्रमाण पत्र अब अनिवार्य रूप से डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज किए जाएंगे। निर्माण के दौरान औचक निरीक्षण में यदि डामरीकरण या कंक्रीट कार्य तय मानक से कम पाया गया, तो भुगतान रोकने के साथ संबंधित सुपरविजन अधिकारी की वेतन वृद्धि रोकने और विभागीय जांच शुरू करने का प्रावधान लागू किया गया है।
गुणवत्ता जांच में आधुनिक तकनीक का होगा इस्तेमाल
सार्वजनिक निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए स्वतंत्र थर्ड पार्टी गुणवत्ता परीक्षण व्यवस्था को भी सशक्त किया जा रहा है। अब प्रत्येक बड़े निर्माण कार्य की रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज होगी, जिसमें लैब रिपोर्ट और साइट फोटोग्राफ शामिल रहेंगे। कार्य पूरा होने के बाद तय समय सीमा तक सड़क या भवन के रखरखाव की जिम्मेदारी तय रहेगी। यदि इस गारंटी अवधि के भीतर निर्माण क्षतिग्रस्त होता है, तो सुधार कार्य ठेकेदार के साथ ही मॉनिटरिंग करने वाले अफसरों की निगरानी में तुरंत कराया जाएगा। लापरवाही साबित होने पर रिकवरी की राशि अधिकारियों से भी वसूली जा सकेगी।
पारदर्शिता से रुकेगा सरकारी धन का अनुचित दुरुपयोग
इस व्यवस्था से जहां एक ओर सरकारी धन की बर्बादी पर लगाम लगेगी, वहीं दूसरी ओर समय सीमा में योजनाएं पूरी होंगी। विभाग का मानना है कि केवल ठेकेदारों पर निर्भर रहने से काम में देरी और गुणवत्ताहीनता की शिकायतें बढ़ती थीं। अधिकारियों की सीधी जिम्मेदारी तय होने से जमीनी स्तर पर तकनीकी निगरानी मजबूत होगी और तय मानकों के अनुसार ही विकास कार्य पूरे कराए जा सकेंगे।
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