
छपरा। बिहार (Bihar) के छपरा (Chhapra) में 1 सितंबर की सुबह करीब 7 बजे एक युवक (Young man) बिजली विभाग (Electricity Department) के परिसर में बने टावर पर चढ़ गया। देखते ही देखते मौके पर भीड़ जुट गई। पुलिस, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस भी पहुंच गईं। नीचे युवक की मां और परिवार के लोग उसे उतरने के लिए मनाते रहे, लेकिन वह अपनी मांग पर अड़ा रहा।
युवक का कहना था कि उसके बैंक खाते से करीब 50 लाख रुपए का लेनदेन हुआ है और इसी मामले में साइबर थाने से उसे नोटिस मिला है। वह अपने खिलाफ जारी नोटिस को रद्द करने की मांग कर रहा था। करीब पांच घंटे बाद दोपहर 12 बजे युवक टावर से नीचे उतरा। जमीन पर पैर रखते ही पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया और नगर थाने ले जाकर पूछताछ की।
दोस्त ने गेम खेलने के नाम पर खुलवाया था खाता
युवक की पहचान संजीत कुमार उर्फ भोला के रूप में हुई है। वह छपरा के बिचला तेलपा का रहने वाला है और साइबर कैफे चलाता है। संजीत के मुताबिक, करीब डेढ़ साल पहले उसके एक दोस्त ने गेम खेलने के नाम पर उसका बैंक खाता खुलवाया था। बाद में इसी खाते से लाखों रुपए का लेनदेन किया गया। संजीत का आरोप है कि उसके साथियों ने उसके साथ धोखा किया और उसके बैंक खाते का इस्तेमाल किया। उसका कहना है कि उसे इस लेनदेन की जानकारी नहीं थी।
साइबर थाने से आया 50 लाख के लेनदेन का नोटिस
संजीत के मुताबिक, कुछ समय बाद उसे साइबर थाने से नोटिस मिला। इसमें उसके बैंक खाते से हुए करीब 50 लाख रुपए के लेनदेन को लेकर जवाब मांगा गया था। वह इस मामले में मदद मांगने साइबर थाने भी गया। हालांकि, उसका दावा है कि वहां उसे वैसी मदद नहीं मिली, जिसकी उसे उम्मीद थी। इसके बाद उसकी परेशानी बढ़ती गई। 1 सितंबर की सुबह वह बिजली विभाग के परिसर में लगे टावर पर चढ़ गया और अपने खिलाफ आए नोटिस को रद्द करने की मांग करने लगा।
मां नीचे खड़ी होकर बेटे को मनाती रही
पुलिस और परिवार के लोगों ने काफी देर तक संजीत को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नीचे आने के लिए तैयार नहीं हुआ। उसकी मां भी टावर के नीचे खड़ी होकर लगातार बेटे से उतर आने की गुहार लगाती रही। स्थिति को देखते हुए फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस को भी मौके पर बुला लिया गया।
दूसरा युवक भी टावर पर चढ़ा, फोन पर थानाध्यक्ष ने समझाया
संजीत को नीचे लाने के लिए एक दूसरा युवक भी टावर पर चढ़ा। उसने अपने मोबाइल फोन के जरिए नगर थानाध्यक्ष संजीव कुमार की संजीत से बात कराई। थानाध्यक्ष लगातार उसे समझाते रहे। बातचीत का सिलसिला चलता रहा। नीचे मां और परिवार के लोग इंतजार करते रहे, जबकि पुलिस, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की टीमें मौके पर मौजूद थीं। करीब पांच घंटे बाद संजीत ने आखिरकार टावर से नीचे उतरने का फैसला किया।
पुलिस बोली- साइबर फ्रॉड के मामले में दिया गया था नोटिस
सारण के SDPO सह ASP सदर रामपुकार सिंह के मुताबिक, साइबर थाने में फ्रॉड का एक मामला दर्ज हुआ था। इसी मामले में संजीत को नोटिस जारी किया गया था। पुलिस का कहना है कि नोटिस मिलने के बाद संजीत टावर पर चढ़ गया और जान देने की धमकी देने लगा। वह बार-बार मामले से अपना नाम हटाने की मांग कर रहा था और नीचे नहीं उतरने पर कूदने की धमकी दे रहा था।
संजीत बोला- मैं खुद फ्रॉड का शिकार
पुलिस ने संजीत को सकुशल नीचे उतार लिया, लेकिन अब उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है। संजीत का कहना है कि उसके बैंक खाते का गलत इस्तेमाल किया गया और वह खुद धोखाधड़ी का शिकार है। वहीं पुलिस का कहना है कि उसके खिलाफ साइबर फ्रॉड के मामले में नोटिस जारी हुआ था और टावर पर चढ़कर उसने पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश की। फिलहाल मामले में संजीत और पुलिस के दावे अलग-अलग हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
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