लखनऊ/नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव (Assembly elections) से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) से जुड़े प्रमुख चेहरे सैयद असीम वकार के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाओं ने सियासी माहौल गरमा दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता और टीवी डिबेट में पार्टी का पक्ष रखने वाले असीम वकार बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं। हालांकि, वकार की ओर से अभी तक इस खबर की आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है।
अगर वकार कांग्रेस में शामिल होते हैं तो इसे ओवैसी की पार्टी के लिए यूपी में बड़ा राजनीतिक झटका माना जा सकता है। इसकी वजह यह है कि वकार लंबे समय से AIMIM से जुड़े रहे हैं और उत्तर प्रदेश में पार्टी की गतिविधियों तथा राजनीतिक रुख को सामने रखने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं।
AIMIM से क्यों नाराज बताए जा रहे वकार?
एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि असीम वकार पिछले कुछ समय से AIMIM की उत्तर प्रदेश इकाई से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर असंतुष्ट चल रहे थे।
इसी बीच उनके कांग्रेस में जाने की खबर सामने आई है। हालांकि उनकी नाराजगी की वजह को लेकर वकार की तरफ से सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत बयान नहीं आया है।
AIMIM में शामिल होने से पहले वकार का समाजवादी पार्टी से भी लंबा जुड़ाव रहा है। बताया जाता है कि वह करीब दो दशक तक सपा से जुड़े रहे। ऐसे में उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनका अनुभव कई राजनीतिक खेमों के बीच रहा है।
इमरान प्रतापगढ़ी की भूमिका की भी चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, वकार को कांग्रेस में लाने में पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी की अहम भूमिका बताई जा रही है।
अगर वकार कांग्रेस का हिस्सा बनते हैं तो पार्टी इसे उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देख सकती है। हालांकि, वकार के कांग्रेस में शामिल होने और उनके साथ आने की आधिकारिक तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है।
क्या है ओवैसी का यूपी प्लान?
असीम वकार के संभावित कांग्रेस प्रवेश की चर्चा ऐसे समय हो रही है, जब AIMIM उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है।
असदुद्दीन ओवैसी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि उनकी पार्टी आगामी चुनाव में पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। हालांकि AIMIM कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी, इसका अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।
ओवैसी लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी पार्टी का संगठन पहले की तुलना में मजबूत हुआ है और AIMIM को जनता के बीच एक स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प के तौर पर स्थापित किया जा सकता है।
‘वोटकटवा’ वाली छवि बदलने की कोशिश
उत्तर प्रदेश में AIMIM को लंबे समय से विपक्षी दलों की ओर से ‘वोटकटवा’ पार्टी के तौर पर निशाना बनाया जाता रहा है। ओवैसी इस धारणा को बदलने की कोशिश करते रहे हैं।
उनका तर्क रहा है कि AIMIM किसी दूसरे दल के वोट काटने के लिए नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक एजेंडे के साथ चुनाव लड़ती है। पार्टी का बेहतर प्रदर्शन होने पर उन सीटों पर उसका दावा भी मजबूत हो सकता है, जहां उसका संगठन और जनाधार बढ़ा है।
ऐसे में पार्टी के यूपी में एक प्रमुख प्रवक्ता और सार्वजनिक चेहरा रहे असीम वकार का संभावित जाना AIMIM की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुस्लिम वोटों पर कांग्रेस, सपा और AIMIM की नजर
उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में मुस्लिम मतदाता कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और AIMIM सहित कई राजनीतिक दल इस वर्ग के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी भी यूपी में गठबंधन के साथ चुनावी तैयारी कर रहे हैं। हालांकि सीटों के बंटवारे को लेकर औपचारिक बातचीत अभी शुरू नहीं हुई है।
ऐसे में कांग्रेस के साथ किसी चर्चित राजनीतिक चेहरे का जुड़ना पार्टी के लिए चुनावी और संगठनात्मक स्तर पर अहम हो सकता है। वकार के संभावित कांग्रेस प्रवेश को भी इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
असीम वकार का कांग्रेस में जाना अभी सिर्फ संभावित घटनाक्रम है और इसकी आधिकारिक पुष्टि बाकी है। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे AIMIM के चुनावी समीकरण कितने प्रभावित होंगे।
लेकिन इतना जरूर है कि विधानसभा चुनाव से पहले किसी प्रमुख चेहरे का पार्टी छोड़ना AIMIM के लिए राजनीतिक चुनौती खड़ी कर सकता है। दूसरी ओर, कांग्रेस को वकार के जरिए मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि असीम वकार बुधवार को वास्तव में कांग्रेस में शामिल होते हैं या नहीं और अगर ऐसा होता है तो ओवैसी की पार्टी इस सियासी झटके का जवाब किस रणनीति के साथ देती है।
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