
बड़वानी। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बड़वानी जिले (Barwani district) के आदिवासी बहुल पानसेमल विकासखंड में शिक्षा की जमीनी हकीकत सामने आई है। यहां ग्राम पंचायत करणपुरा के संकुल क्षेत्र दोल्जर आंबा में दो प्राथमिक स्कूल झोपड़ी में चल रहे हैं। इन स्कूलों में बच्चों को पक्के भवन के बजाय झोपड़ी में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
पानसेमल विधानसभा के ग्राम करणपुरा के मोक्सर फलिया और दोल्जर आंबा के प्राथमिक स्कूल झोपड़ी में संचालित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल भवन के साथ-साथ बच्चों के लिए पीने के पानी और आने-जाने की सुविधा भी नहीं है। स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क भी पर्याप्त नहीं है। मोक्सर फलिया की शिक्षिका अनीता डुडवे ने बताया कि वह 2003 से यहां पदस्थ हैं। स्कूल शुरू से ही झोपड़ी में चल रहा है। इस प्राथमिक विद्यालय में सत्र 2025-26 में कुल 23 बच्चे दर्ज हैं।
शिक्षिका ने बताया कि स्कूल भवन की समस्या को लेकर उन्होंने कई बार मौखिक और लिखित आवेदन देकर उच्च अधिकारियों को जानकारी दी है। इसके बावजूद समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। बारिश के दिनों में काफी दिक्कतें आती हैं, क्योंकि झोपड़ी से जगह-जगह पानी टपकता रहता है और बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते। दोल्जर आंबा के गांव पटेल संदीप डूडवे ने बताया कि ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को स्कूल भवन की समस्या के बारे में बताया है। लेकिन अभी तक स्कूल भवन का निर्माण नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि गांव के बच्चों का भी सपना है कि वे पढ़-लिखकर अधिकारी बनें और आगे बढ़ें।
डीपीसी सोनालिका अचाले ने बताया कि जिले में एक-दो नहीं, बल्कि कई स्कूल भवन झोपड़ियों में चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि भवन के लिए वार्षिक योजना में प्रस्ताव बनाकर 2026-27 के लिए भेज दिया गया है। जिले में लगभग 89 जर्जर भवनों को लेकर प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही भवनों पर काम शुरू किया जाएगा।
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