लंदन। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) के लंदन दौरे को लेकर विवाद शुरू हो गया है। करीब 20 सिविल सोसायटी संगठनों ने लंदन के मेयर सादिक खान (Sadiq Khan) को पत्र लिखकर आरएसएस से जुड़े कार्यक्रमों का बहिष्कार करने और कार्यक्रम के लिए सरकारी स्तर पर किसी तरह का वेन्यू उपलब्ध नहीं कराने की अपील की है।
भागवत का लंदन कार्यक्रम आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय आउटरीच कार्यक्रम का हिस्सा बताया जा रहा है। इस दौरे में कनाडा और अमेरिका के अलावा ब्रिटेन भी शामिल है। लंदन में भागवत भारतीय समुदाय को संबोधित करने वाले हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 20 संगठनों ने ग्रेटर लंदन अथॉरिटी से अपील की है कि आरएसएस के कार्यक्रमों के लिए सरकारी या सार्वजनिक स्थल उपलब्ध न कराया जाए। पत्र में इन संगठनों ने आरएसएस को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
पत्र पर Hindus for Human Rights, UK-Indian Muslim Council, India Labour Solidarity और South Asia Solidarity Group समेत कई संगठनों के हस्ताक्षर बताए गए हैं। संगठनों ने मेट्रोपॉलिटन पुलिस से यह भी जानकारी मांगी है कि भागवत के दौरे के दौरान विभिन्न समुदायों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए जा रहे हैं।
ब्रिटिश मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पत्र में आरएसएस को लेकर दावा किया गया है कि संगठन की विचारधारा यूरोपीय फासीवाद से प्रेरित रही है। इन संगठनों ने आशंका जताई है कि भागवत की यात्रा ब्रिटेन में आरएसएस से जुड़े समूहों को कथित तौर पर नफरत भरे भाषण देने और भारतीय मूल के लोगों के बीच विभाजन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।
पत्र में यह भी दावा किया गया है कि भागवत का दौरा ब्रिटेन में कुछ संवेदनशील समुदायों के बीच डर और असुरक्षा का माहौल पैदा कर सकता है। हालांकि, ये संबंधित संगठनों द्वारा लगाए गए आरोप हैं।
भागवत के विदेश दौरे को लेकर अमेरिका में भी विरोध सामने आया था। आरएसएस के 100 साल पूरे होने के अवसर पर चल रहे अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत अमेरिका में भी उनके कार्यक्रम आयोजित किए गए थे, जिन्हें लेकर कुछ संगठनों ने आपत्ति जताई थी।
अब लंदन में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर विरोध सामने आने से ब्रिटेन में भी इस दौरे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।
पूर्व लेबर नेता जेरेमी कॉर्बिन ने भी भागवत के दौरे पर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन को ऐसे संगठन के नेता की मेजबानी नहीं करनी चाहिए, जिस पर नफरत फैलाने और दक्षिणपंथी हिंसा से जुड़े होने के आरोप लगते रहे हैं।
कॉर्बिन ने आरएसएस को कथित तौर पर तानाशाही, बहिष्कारी और भेदभावपूर्ण संगठन बताते हुए धार्मिक स्वतंत्रता तथा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से जुड़े आरोप लगाए।
जहां एक तरफ कुछ संगठनों और नेताओं ने भागवत के कार्यक्रम का विरोध किया है, वहीं ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन ने उनके कार्यक्रम को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
ब्लैकमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि उन्हें आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के विचार सुनकर खुशी हुई। उन्होंने भागवत द्वारा आरएसएस के भविष्य को लेकर साझा किए गए विचारों और योजनाओं का भी उल्लेख किया।
इस तरह भागवत के लंदन दौरे से पहले ही ब्रिटेन में उनके कार्यक्रम को लेकर समर्थन और विरोध, दोनों तरह के स्वर सामने आने लगे हैं। अब देखना होगा कि स्थानीय प्रशासन इस कार्यक्रम को लेकर क्या रुख अपनाता है।
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