
नई दिल्ली । सत्य निकेतन हादसे पर (Over Satya Niketan Incident) राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दुख जताया (President, Vice President and Prime Minister expressed Grief) ।
देश की राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक दर्दनाक हादसे में बहुमंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से सटे इस व्यस्त इलाके में हुई इस भीषण दुर्घटना पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी सहित शीर्ष नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। हादसे के तुरंत बाद मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए एनडीआरएफ, दमकल विभाग और दिल्ली पुलिस द्वारा युद्धस्तर पर संयुक्त राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना में मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की । उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति दुख व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: पीएम ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की। उन्होंने आश्वस्त किया कि संबंधित एजेंसियां मौके पर राहत कार्यों में पूरी मुस्तैदी से जुटी हैं और प्रभावितों को हरसंभव मदद पहुंचाई जा रही है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बहुमूल्य जानों के नुकसान को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में उनकी पूरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने हादसे पर दुख जताते हुए बताया कि इस संदर्भ में उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री से बात कर स्थिति की समीक्षा की है और मलबे से सुरक्षित निकासी के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्वयं सत्य निकेतन पहुंचकर घटनास्थल का मुआयना किया। उन्होंने राहत एवं बचाव दल के वरिष्ठ अधिकारियों से रेस्क्यू अभियान की प्रगति की जानकारी ली और हर स्तर पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि मलबे में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित निकालने और घायलों को त्वरित व उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।
दिल्ली पुलिस और आपदा प्रबंधन के प्राथमिक आकलन के अनुसार हादसे की शिकार हुई इमारत करीब 40 से 50 वर्ष पुरानी थी। इस ढांचे में एक बेसमेंट और उसके ऊपर पांच मंजिलें निर्मित थीं, जिसे मुख्य रूप से छात्रों व कामकाजी युवाओं के लिए पीजी के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि हादसे के समय इमारत के बेसमेंट में मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का काम चल रहा था, जिस दौरान संभवतः संरचनात्मक कमजोरी के चलते यह पूरा ढांचा ढह गया। कंक्रीट के भारी मलबे को हटाने के लिए क्रेन और कटर मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि नीचे फंसे संभावित लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
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