
चेन्नई । तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय (Tamilnadu Chief Minister Vijay) ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां (Derogatory Remarks against Women) बर्दाश्त नहीं की जाएंगी (Will not be Tolerated) । उन्होंने डीएमके के कई वरिष्ठ नेताओं पर सरकार में रहते हुए भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाया।
पुलिस विभाग के लिए ग्रांट की मांग पर विधानसभा में हुई बहस का जवाब देते हुए, विजय ने कहा कि राजनीतिक आलोचना तो ठीक है, लेकिन महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी । सदन में तीखी बहस के बीच उन्होंने कहा कि महिलाओं के बारे में अश्लील या अपमानजनक टिप्पणी करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने उन बयानों की भी आलोचना की जो कथित तौर पर डीएमके पदाधिकारियों ने उन लोगों के खिलाफ दी थी जिन्होंने पार्टी को वोट नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियां लोगों के फैसले के प्रति सम्मान की कमी को दिखाती हैं और यही वजह है कि पार्टी अब विपक्ष में बैठी है।
भ्रष्टाचार के आरोपों पर बात करते हुए सीएम विजय ने उन दस्तावेजों और नतीजों का जिक्र किया जो उनके अनुसार आधिकारिक रिकॉर्ड और विधानसभा लाइब्रेरी में मौजूद थे। उन्होंने 1977 की सरकारिया आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया और वीरनम पाइपलाइन प्रोजेक्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री के अनुसार, कॉन्ट्रैक्ट देने के लिए कमीशन की मांग की गई थी, जबकि मुख्यमंत्री कार्यालय(सीएमओ) का कथित तौर पर एक खास कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए गलत इस्तेमाल किया गया था।
सीएम विजय ने पार्टी फंड के नाम पर पैसे इकट्ठा करने से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि कुछ लेन-देन में 7.5 से 10 प्रतिशत तक कमीशन लिया गया था। उन्होंने कहा कि पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी ने कथित तौर पर अपने आधिकारिक पद का गलत इस्तेमाल किया था। मुख्यमंत्री ने आगे दावा किया कि पूर्व मंत्री से जुड़े अधिकारी और लोग कथित लेनदेन में शामिल थे। एजेंसी के आरोपों का जिक्र करते हुए उन्होंने डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन और पार्टी नेता उदयनिधि स्टालिन का भी नाम लिया। हालांकि, विजय की ओर से कही गई बातें अभी भी सिर्फ आरोप ही हैं, किसी कोर्ट ने उनको दोषी नहीं ठहराया है।
उन्होंने ने कहा कि रिकॉर्ड बहुत बड़े हैं और उन्हें पूरा पढ़ने में लगभग दो दिन लगेंगे, इसलिए उन्होंने सदन के सामने केवल एक सारांश पेश किया। उन्होंने डीएमके को चुनौती दी कि वे सबूत मांगने के बजाय आरोपों का जवाब दें, क्योंकि उनके अनुसार सबूत पहले से ही सार्वजनिक रिकॉर्ड में मौजूद थे। अपनी बात खत्म करते हुए सीएम विजय ने कहा कि वे राजनीति में न तो पद के लिए और न ही सत्ता के लिए आए हैं, बल्कि लोगों की सेवा करने के लिए आए हैं। सी.एन. अन्नादुरई, एम.जी. रामचंद्रन और एन.टी. रामाराव की विरासत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध पर आखिरकार जनता का प्यार ही जीतेगा।
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