मंगलुरु। कर्नाटक के मंगलुरु में संतरे बेचकर (By selling oranges) अपने गांव में स्कूल स्थापित करने वाले पद्मश्री पुरस्कार (Padma Shri Award) से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता हरेकाला हजब्बा (hare black hajabba) इन दिनों मतदाता सूची से जुड़े एक प्रशासनिक मामले को लेकर चर्चा में हैं। चुनाव आयोग के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची में उनके नाम में अंतर पाए जाने के बाद उन्हें नोटिस जारी किया गया है।
मामला वर्ष 2002 की पुरानी मतदाता सूची से जुड़ा है। इस सूची में उनका नाम केवल ‘हजब्बा’ दर्ज है। वहीं, बाद में जारी हुए उनके अधिकांश सरकारी और आधिकारिक दस्तावेजों में पूरा नाम ‘हरेकाला हजब्बा’ दर्ज है।
मतदाता सूची के पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान दस्तावेजों में नाम के इस अंतर के सामने आने के बाद चुनावी रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया के तहत उन्हें नोटिस दिया गया है।
हरेकाला हजब्बा के आधार कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट और नए मतदाता पहचान पत्र में उनका नाम ‘हरेकाला हजब्बा’ दर्ज बताया गया है। इसके अलावा भारत सरकार की ओर से दिए गए पद्मश्री सम्मान तथा उनके अन्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों में भी यही नाम दर्ज है।
ऐसे में 2002 की मतदाता सूची में केवल ‘हजब्बा’ नाम दर्ज होने को लेकर अब रिकॉर्ड का मिलान और आवश्यक सुधार की प्रक्रिया शुरू हुई है।
नोटिस की तामीली के लिए एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हरेकाला हजब्बा के घर पहुंचीं और उन्हें चुनाव आयोग का नोटिस सौंपा। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वह 11 सितंबर को अपने ग्राम पंचायत कार्यालय में उपस्थित होकर आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें।
हरेकाला हजब्बा मंगलुरु की सड़कों पर संतरे बेचकर अपनी आजीविका चलाते थे। उन्होंने अपने गांव के बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल स्थापित करने का बीड़ा उठाया और इसके लिए वर्षों तक मेहनत की। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया था।
अब मतदाता सूची में नाम के अंतर से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया के चलते उन्हें अपने आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुरूप चुनावी दस्तावेजों में नाम का सत्यापन और सुधार कराना होगा।
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