
नई दिल्ली ।अभिनेता रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) नितेश तिवारी की फिल्म रामायण (Ramayana) में भगवान राम की भूमिका निभाते नजर आएंगे। उनकी इस भूमिका और कास्टिंग को लेकर रामानंद सागर (Ramanand Sagar) के पोते शिव सागर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने फिल्म की कास्टिंग में रणबीर कपूर को छोड़कर बाकी कलाकारों के चयन को पसंद किया, लेकिन अभिनेता को भगवान राम (Lord Ram) के रूप में स्वीकार करने में अपनी व्यक्तिगत असहमति (Disagreement) जाहिर की। शिव सागर के मुताबिक, रणबीर को एनिमल जैसी फिल्म में अलग तरह के किरदार में देखने के बाद उन्हें राम के रूप में स्वीकार करना मुश्किल लगता है।
शिव सागर ने कहा कि रामायण के लिए रणबीर कपूर की जगह किसी नए चेहरे को चुना जाना चाहिए था। उनका कहना है कि जब वह भगवान राम के बारे में सोचते हैं तो उनके मन में ऐसे कलाकार का विचार आता है, जिसकी कोई पिछली छवि दर्शकों के दिमाग में मौजूद न हो। उनके अनुसार, रणबीर के साथ उनके पहले निभाए गए किरदारों की एक छवि जुड़ी हुई है, जिसकी वजह से उन्हें इस भूमिका में देखना उनके लिए सहज नहीं है।
उन्होंने फिल्म के अन्य कलाकारों की भी तारीफ की। शिव सागर ने कहा कि मजबूत सहायक कलाकारों को शामिल किया जा सकता है और यश उन्हें काफी अच्छे लग रहे हैं। उन्होंने साई पल्लवी की भी तारीफ करते हुए कहा कि उनके साथ किसी पुरानी छवि या बैगेज की समस्या नहीं है। शिव सागर के मुताबिक, यही वजह है कि उनके परिवार की ओर से बनाए गए धारावाहिकों में आमतौर पर नए चेहरों को प्राथमिकता दी जाती रही है, ताकि कलाकारों पर उनके पुराने किरदारों या इतिहास का बोझ न हो।
हालांकि, शिव सागर ने स्पष्ट किया कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर रणबीर कपूर से कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने अभिनेता को बहुत अच्छा कलाकार बताया। उनका कहना है कि रणबीर को अलग-अलग तरह की भूमिकाओं में देखा गया है और वह एक अच्छे अभिनेता हैं। इसलिए उनकी आपत्ति रणबीर की अभिनय क्षमता को लेकर नहीं, बल्कि भगवान राम जैसे किरदार के लिए उनके चयन को लेकर है।
शिव सागर ने यह भी कहा कि संभव है कि इस प्रोजेक्ट के लिए रणबीर कपूर को चुनने के पीछे मार्केटिंग से जुड़ी सोच रही हो। उनके अनुसार, रणबीर के शामिल होने से फिल्म को मार्केटिंग के स्तर पर फायदा मिल सकता है। अगर रणबीर को फिल्म में नहीं लिया जाता, तो शायद इसकी मार्केटिंग उतनी प्रभावी तरीके से नहीं हो पाती। इसके बावजूद शिव सागर का व्यक्तिगत मत है कि ऐसे किरदारों के लिए नए चेहरे को मौका देना ज्यादा बेहतर विकल्प होता।
राम और रामायण से जुड़े भावनात्मक पक्ष पर बात करते हुए शिव सागर ने कहा कि यह विषय लोगों के लिए बेहद संवेदनशील है। उनके मुताबिक, सवाल यह भी है कि रामायण के बाद रणबीर को एनिमल जैसी फिल्म में दोबारा दर्शक किस तरह स्वीकार करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत में राम को केवल माइथोलॉजी यानी पौराणिक कथा के तौर पर नहीं देखा जाता। लोग रोज उनकी पूजा करते हैं और राम को अपने इतिहास का हिस्सा मानते हैं। इसी कारण रामायण से जुड़े किरदारों को लेकर लोगों की भावनाएं अधिक गहरी हैं।
अपनी राय रखने के बावजूद शिव सागर ने माना कि फिल्म को लेकर अंतिम फैसला जनता के हाथ में होगा। इसी बीच महाराष्ट्र के कर्जत में राम मंदिर का निर्माण कार्य भी पूरा हो चुका है। इसके साथ सागर परिवार की तीन पीढ़ियों से चली आ रही इच्छा पूरी हुई। इस मंदिर का सपना रामानंद सागर ने देखा था, उनके बेटे प्रेम सागर ने इसे आगे बढ़ाया और राजस्थान से भगवान राम की मूर्ति भी मंगवाई थी। पिछले वर्ष प्रेम सागर के निधन के बाद उनके बेटे और निर्माता-निर्देशक शिव सागर ने कर्जत में मंदिर का निर्माण कार्य पूरा कराया।
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