
नई दिल्ली । मीडिया पर चांद की तस्वीर साझा की, जिस पर चंद्रमा हमारा है लिखा था और तस्वीर में अमेरिकी झंडा (American Flag) भी लगाया गया था। इसी के साथ चांद पर जमीन खरीदने (Moon Land) और उसे उपहार में देने के दावों ने फिर सवाल खड़ा किया कि आखिर चांद पर अधिकार (Ownership) किसका है।
लोग जन्मदिन, शादी या दूसरे अवसरों पर चांद की जमीन खरीदकर एक-दूसरे को उपहार देने का दावा करते हैं। कई कंपनियां भी चांद की जमीन के नाम पर प्रमाण पत्र और दस्तावेज बेचती हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार इन दस्तावेजों से चांद की जमीन पर वास्तविक कानूनी मालिकाना हक नहीं मिलता।
चांद और दूसरे खगोलीय पिंडों को लेकर बुनियादी नियम 1967 की अंतरिक्ष संधि में तय किए गए हैं। इस संधि पर 1966 में कानूनी उपसमिति में विचार हुआ और उसी वर्ष महासभा में सहमति बनी। जनवरी 1967 में इसे हस्ताक्षर के लिए खोला गया और अक्तूबर 1967 में यह लागू हुई। भारत और अमेरिका समेत 114 देश इसके पक्षकार हैं।
संधि के मुताबिक अंतरिक्ष की खोज और उसका इस्तेमाल सभी देशों के लाभ और हित के लिए होना चाहिए। बाहरी अंतरिक्ष सभी देशों के लिए खुला है और चांद तथा दूसरे खगोलीय पिंडों के सभी क्षेत्रों तक समान आधार पर पहुंच और इस्तेमाल की स्वतंत्रता है। वैज्ञानिक अनुसंधान की भी स्वतंत्रता दी गई है।
संधि का अनुच्छेद 2 सबसे महत्वपूर्ण है। इसके अनुसार बाहरी अंतरिक्ष, जिसमें चांद और दूसरे खगोलीय पिंड शामिल हैं, किसी देश के राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र का हिस्सा नहीं बनाए जा सकते। कोई देश संप्रभुता, कब्जे या इस्तेमाल के जरिए चांद के किसी हिस्से को अपना राष्ट्रीय क्षेत्र घोषित नहीं कर सकता। इसलिए चांद हमारा है वाला दावा संधि के इस नियम के संदर्भ में सवाल खड़ा करता है।
हालांकि चांद पर किसी देश का राष्ट्रीय अधिकार नहीं हो सकता, लेकिन वहां जाना और वैज्ञानिक गतिविधियां करना प्रतिबंधित नहीं है। अंतरिक्ष सभी देशों के लिए खोज और इस्तेमाल के लिए खुला है। ऐसी गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप होनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा, सहयोग तथा आपसी समझ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जानी चाहिए।
अनुच्छेद 8 के अनुसार किसी देश में पंजीकृत अंतरिक्ष वस्तु पर उस देश का अधिकार और नियंत्रण बना रहता है, भले ही वह अंतरिक्ष या किसी खगोलीय पिंड पर मौजूद हो। चांद पर उतारे या बनाए गए अंतरिक्ष यान, उपकरण और उनके हिस्सों का स्वामित्व केवल वहां पहुंचने से समाप्त नहीं होता। यानी चांद पर भेजा गया यान या उपकरण संबंधित देश की संपत्ति रह सकता है, लेकिन इससे चांद की जमीन पर उसका अधिकार स्थापित नहीं होता।
अनुच्छेद 7 अंतरिक्ष वस्तुओं से होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी से जुड़ा है। किसी देश द्वारा लॉन्च की गई या उसकी व्यवस्था से लॉन्च हुई वस्तु से पृथ्वी, वायु, अंतरिक्ष या चांद समेत किसी खगोलीय पिंड पर दूसरे देश, उसके नागरिकों या कानूनी संस्थाओं को नुकसान होने पर संबंधित देश की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी बन सकती है।
अनुच्छेद 9 देशों को सहयोग और आपसी सहायता का पालन करने तथा हानिकारक प्रदूषण से बचने के लिए कहता है। यदि किसी गतिविधि से दूसरे देशों के शांतिपूर्ण अंतरिक्ष इस्तेमाल को नुकसान पहुंचने की आशंका हो, तो पहले उचित अंतरराष्ट्रीय परामर्श करना होगा।
चांद पर मौजूद स्टेशन, उपकरण और अंतरिक्ष यान को लेकर भी नियम हैं। दूसरे पक्षकार देशों के प्रतिनिधियों के लिए इन्हें पारस्परिकता के आधार पर खुला रखा जाना चाहिए, हालांकि यात्रा से पहले उचित सूचना देना जरूरी है।
निजी कंपनियों पर भी यही अंतरराष्ट्रीय ढांचा लागू होता है। अनुच्छेद 6 के अनुसार गैर-सरकारी संस्थाओं की अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए संबंधित देश की अनुमति और लगातार निगरानी जरूरी है।
चांद की जमीन बेचने के दावे लंबे समय से सामने आते रहे हैं। जर्मनी के मार्टिन जुर्गेंस ने चांद को अपने परिवार की संपत्ति बताया था। बाद में अमेरिकी कारोबारी डेनिस होप ने लूनर एंबेसी नाम की संस्था शुरू कर चांद की जमीन करीब 25 डॉलर प्रति एकड़ में बेचने का दावा किया। उन्होंने अंतरिक्ष संधि की व्याख्या के आधार पर निजी दावे की गुंजाइश मानी थी।
ऐसी जमीन के प्रमाणपत्र आज भी लोगों को आकर्षित करते हैं। कुछ लोग इन्हें मनोरंजन या उपहार के रूप में खरीदते हैं, जबकि कुछ इसे निवेश समझ लेते हैं। सुशांत सिंह राजपूत और शाहरुख खान के नाम पर भी चांद पर प्लॉट होने की बातें सामने आई हैं। फिलहाल कुछ कंपनियां करीब 37.50 डॉलर यानी लगभग 3,100 रुपये प्रति एकड़ में ऐसे प्रमाणपत्र बेच रही हैं, लेकिन इनसे कानूनी मालिकाना हक नहीं मिलता।
अलग-अलग देशों के चंद्र मिशनों ने जरूर चांद तक पहुंचने का रास्ता बनाया है। सोवियत संघ के लूना मिशनों से लेकर अमेरिका के अपोलो कार्यक्रम, जापान के हितेन, यूरोप के स्मार्ट-1, भारत के चंद्रयान, चीन के चांग’ई मिशनों और निजी ब्लू घोस्ट-1 तक कई मिशन चांद तक पहुंचे हैं। 2026 में आर्टेमिस-2 ने चार अंतरिक्ष यात्रियों को चांद के आसपास पहुंचाया और करीब 10 दिन बाद सभी सुरक्षित पृथ्वी लौटे। इन उपलब्धियों के बावजूद किसी देश को चांद की जमीन पर राष्ट्रीय मालिकाना हक नहीं मिलता।
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