
रायसेन। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के रायसेन जिले में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। सहकारी समितियों के कर्मचारियों ने ऐसे किसानों के खेतों का फर्जी रजिस्ट्रेशन करा दिया, जिन्होंने समर्थन मूल्य पर मूंग बेचने के लिए पंजीयन कराया ही नहीं था। इसके बाद बाजार और मंडी से सस्ती कीमत पर मूंग खरीद कर उसे किसानों के नाम पर सरकारी उपार्जन केंद्रों में समर्थन मूल्य पर बेच दिया। इस मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने बरेली तहसील निवासी रंजीत ठाकुर, श्रीराम ठाकुर और गौरव ठाकुर के समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की हैं। आरोपियों पर करीब 13 लाख 35 हजार रुपए का अनुचित लाभ कमाने और शासन को इतनी ही राशि के नुकसान पहुंचाने का आरोप हैं। इस मामले ईओडब्ल्यू की जांच जारी हैं।
किसानों के खेत का कराया फर्जी पंजीयन
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि जिला सहकारी बैंक रायसेन की बाड़ी शाखा के अंतर्गत आने वाली कृषक सेवा सहकारी समितियों देहरीकला, भारकच्छ कला और गूगलवाड़ा में वर्ष 2024-25 और 2025-26 के मूंग उपार्जन के दौरान फर्जी पंजीयन किए गए। समिति देहरीकला के कंप्यूटर ऑपरेटर श्रीराम ठाकुर और कर्मचारी रंजीत ठाकुर तथा भारकच्छ कला समिति के कंप्यूटर ऑपरेटर गौरव ठाकुर पर आरोप है कि उन्होंने उन किसानों की जमीन का इस्तेमाल किया, जिन्होंने मूंग बेचने के लिए पंजीयन नहीं कराया था। पंजीयन के दौरान जमीन मालिक या वास्तविक कौलीदार की जगह आरोपियों ने खुद को सिकमीदार के रूप में दर्ज कर दिया। जांच में किसानों ने बताया कि उन्होंने न तो किसी को अपनी जमीन के पंजीयन की अनुमति दी थी और न ही कोई कौलीनामा दिया था।
बाजार से 3 हजार से कम में खरीदी मूंग
जांच में फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा तरीका यह सामने आया कि आरोपियों ने किसानों के खेत की उपज के बजाय बाजार, व्यापारियों और बरेली मंडी से मूंग खरीदी। यह मूंग करीब 3 हजार रुपये प्रति क्विंटल से कम कीमत में खरीदी गई थी। इसके बाद इसी मूंग को समर्थन मूल्य पर सरकारी उपार्जन केंद्रों में बेच दिया गया। वर्ष 2024-25 में मूंग का समर्थन मूल्य 8,558 रुपये प्रति क्विंटल, जबकि वर्ष 2025-26 में 8,682 रुपये प्रति क्विंटल था। यानी बाजार से सस्ते दाम में खरीदी गई मूंग को को कई गुना अधिक कीमत पर बेचकर मुनाफा कमाया गया।
किसानों को पता ही नहीं था उनके नाम पर मूंग बिक रही है
जांच में यह भी सामने आया कि जिन किसानों की जमीन और नाम का इस्तेमाल किया गया, उन्हें इस पूरे खेल की जानकारी तक नहीं थी। एक किसान की करीब डेढ़ एकड़ जमीन का पंजीयन दूसरे व्यक्ति के नाम पर कर दिया गया और उस पर मूंग बेच दी गई। एक अन्य किसान की पत्नी और बहू के नाम दर्ज करीब ढाई एकड़ जमीन का अलग-अलग लोगों के नाम पर पंजीयन किया गया। एक अन्य मामले में किसान की पत्नी की करीब पौने दो एकड़ जमीन का भी फर्जी पंजीयन सामने आया। खास बात यह है कि इन पंजीयनों में दर्ज बैंक खाते भी संबंधित किसानों के नहीं थे। किसानों ने जांच के दौरान स्पष्ट कहा कि उन्होंने न तो पंजीयन के लिए सहमति दी थी, न कौलीनामा दिया और न ही उन्हें इस बिक्री से कोई पैसा मिला।
तीन आरोपियों ने ऐसे कमाया लाखों का मुनाफा
जांच में सामने आया कि श्रीराम ठाकुर ने अपने नाम पर करीब 12.62 हेक्टेयर जमीन का पंजीयन कराकर 151.524 क्विंटल मूंग बेची। इसके बदले उसे शासन से करीब 13.15 लाख रुपये मिले, जबकि मूंग खरीदने में लगभग 4.54 लाख रुपये खर्च हुए। इस तरह करीब 8.60 लाख रुपये का लाभ कमाया गया। इसी तरह रंजीत ठाकुर ने 3.523 हेक्टेयर जमीन के पंजीयन पर 42.276 क्विंटल मूंग बेचकर करीब 3.67 लाख रुपये प्राप्त किए और करीब 2.40 लाख रुपये का लाभ कमाया। गौरव ठाकुर ने 3.428 हेक्टेयर जमीन के फर्जी पंजीयन पर 41.136 क्विंटल मूंग बेची। इसके बदले उसे करीब 3.57 लाख रुपये मिले और लगभग 2.33 लाख रुपये का लाभ हुआ। तीनों मामलों को मिलाकर करीब 13.35 लाख रुपये का अनुचित लाभ और शासन को इतनी ही राशि का नुकसान सामने आया है।
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