
नई दिल्ली ।अगर आपकी उम्र 30 साल या उससे अधिक है और वजन सामान्य है, शरीर में कोई खास परेशानी (Health Problem) महसूस नहीं होती तथा रोजमर्रा की जिंदगी सामान्य तरीके से चल रही है, तब भी स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों (Health Experts) के मुताबिक, कई ऐसी बीमारियां (Diseases) हैं जो शुरुआती दौर में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखातीं और धीरे-धीरे शरीर के भीतर बढ़ती रह सकती हैं। इसलिए समय-समय पर स्वास्थ्य जांच (Health Checkup) और डॉक्टर की सलाह (Medical Advice) लेना जरूरी माना जाता है।
कई लोग केवल इस आधार पर खुद को पूरी तरह स्वस्थ मान लेते हैं कि उनका वजन नियंत्रित है और उन्हें किसी तरह का दर्द या दूसरी परेशानी नहीं है। लेकिन हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट संकेत के रह सकता है। इसी तरह डायबिटीज और प्रीडायबिटीज भी शुरुआती चरण में कई बार चुपचाप बढ़ती रहती है। ऐसे में केवल बाहर से फिट दिखाई देना ही पूरी तरह स्वस्थ होने की गारंटी नहीं है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की गाइडलाइन के अनुसार, बीमारी के स्पष्ट लक्षण नहीं होने पर भी 30 वर्ष की उम्र के बाद डायबिटीज और लिपिड प्रोफाइल की जांच कराते रहना चाहिए। इसका उद्देश्य उन स्वास्थ्य समस्याओं का समय रहते पता लगाना है, जो शुरुआत में बिना किसी खास संकेत के मौजूद हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, 30 वर्ष की उम्र के बाद उन लोगों को अपनी सेहत को लेकर विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए, जिनके परिवार में पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या अधिक वजन जैसी समस्याओं का इतिहास रहा है। परिवार में बीमारियों का इतिहास व्यक्ति के स्वास्थ्य जोखिम से जुड़ा हो सकता है।
भारतीयों में डायबिटीज को एक बड़ा स्वास्थ्य जोखिम माना जाता है। ब्लड शुगर बढ़ा होने के बावजूद कई लोगों में लंबे समय तक कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देता। व्यक्ति सामान्य जीवन जीता रहता है, जबकि उसके शरीर में शुगर का स्तर बढ़ता रह सकता है। इसलिए 30 वर्ष के बाद टाइप-2 डायबिटीज की जांच को खास महत्व दिया जाता है। परिवार में डायबिटीज का इतिहास, अधिक वजन और शारीरिक गतिविधियों में कमी होने पर जोखिम बढ़ सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर को भी साइलेंट बीमारी माना जाता है, क्योंकि कई लोगों में इसके स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। सिरदर्द या चक्कर नहीं आना यह साबित नहीं करता कि ब्लड प्रेशर सामान्य है। इसी तरह बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल भी आमतौर पर कोई खास लक्षण नहीं देता और इसका पता लिपिड प्रोफाइल जैसे परीक्षण से लगाया जाता है।
30 की उम्र के बाद समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच कराना और अपने स्वास्थ्य जोखिम के अनुसार कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना महत्वपूर्ण हो सकता है। सामान्य वजन होने के बावजूद कम शारीरिक गतिविधि, खानपान से जुड़ी समस्याएं, धूम्रपान या परिवार में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का इतिहास होने पर भी सतर्क रहना चाहिए।
डॉक्टरों के अनुसार, 30 वर्ष के बाद नियमित हेल्थ चेकअप कराते रहना उपयोगी है, लेकिन कौन से परीक्षण जरूरी हैं, इसका निर्णय उम्र, पारिवारिक इतिहास, वजन, ब्लड प्रेशर और खानपान जैसी स्थितियों को देखकर डॉक्टर की सलाह से किया जाना चाहिए। आम तौर पर ब्लड प्रेशर की नियमित जांच और डायबिटीज की स्क्रीनिंग महत्वपूर्ण मानी जाती है, जबकि जोखिम के आधार पर लिपिड प्रोफाइल कराया जा सकता है। लगातार थकान, वजन में असामान्य बदलाव या कोई अन्य परेशानी होने पर समय रहते डॉक्टर से सलाह लेकर जांच करानी चाहिए।