
उज्जैन। उज्जैन (Ujjain) के खड़े हनुमान मंदिर मामले में अब पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की एंट्री हुई है। उन्होंने सीएम डॉ मोहन को पत्र लिखा है। जिसमें भोपाल के कमलापति पार्क के पास की मस्जिद का हवाला दिया और कहा कि आप स्वयं उज्जैयनी के ही हैं, उज्जैयनी शहर और उज्जैयनी के सभी धार्मिक स्थानों की गरिमा को आपसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता। हम विकास और आस्था को साथ लेकर चलते हैं। यही समाधान उज्जैयनी के खड़े हनुमान मंदिर का हो सकता है।
भाजपा का फायर ब्रांड नेता व एमपी की पूर्व सीएम उमा भारती ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन को पत्र लिखा है। आप स्वयं उज्जैयनी के ही हैं, उज्जैयनी शहर और उज्जैयनी के सभी धार्मिक स्थानों की गरिमा को आपसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता. उज्जैयनी के खड़े हनुमान मंदिर का समाधान आप स्वयं भी सोच रहे होंगे। हमारे प्रदेश की राजधानी भोपाल में शिवराज सरकार के समय पर कमलापति पार्क के आगे जब सड़क का चौड़ीकारण हुआ तो वहां मस्जिद को छुआ भी नहीं गया और पूरा प्लान बदल कर के रोड़ बनाया गया क्योंकि हम विकास और आस्था को साथ लेकर चलते हैं. यही समाधान उज्जैयनी के खड़े हनुमान मंदिर का हो सकता है।
गौरतलब है कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी चौड़ीकरण की जद में आया उज्जैन का प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर अब सिर्फ शहर ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर मंदिर से जुड़े वीडियो और रील लगातार वायरल हो रहे हैं और दूर-दराज से श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंच रहे हैं।
दरअसल, प्रतिमा को दूसरी जगह स्थापित करने के लिए प्रशासन की ओर से कई प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हट पाई है। इसी के बाद श्रद्धालुओं के बीच यह चर्चा और तेज हो गई है कि “शायद बाबा खुद यहां से नहीं जाना चाहते।” यह भक्तों की आस्था से जुड़ी मान्यता है, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
हिंदू संगठन भी मैदान में
मंगलवार को भी मंदिर परिसर में विश्व हिंदू परिषद और अन्य हिंदू संगठनों से जुड़े पदाधिकारी पहुंचे थे। सुंदरकांड का पाठ और महाआरती भी की गई थी। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर धार्मिक स्थलों और उनसे जुड़ी जनभावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि आगे संतों, समाज के प्रमुख लोगों और हिंदू संगठनों से चर्चा की जाएगी। इसके बाद प्रशासन से भी बातचीत की जाएगी और आगे की रणनीति तय होगी।
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