
शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी (Shivpuri) में आबकारी विभाग की कथित निष्क्रियता पर फूटा महिलाओं का गुस्सा, पुलिस-प्रशासन की टीम को भी खदेड़ा ! पिछोर, अमोला, बैरागढ़ और नरवर के थरखेड़ा के बाद गुरुवार को अमोलपठा और भौंती में भी शराब दुकानों के खिलाफ महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शन के दौरान बोतलें फोड़ी गईं और दुकानों में तोड़फोड़ कर डाली।अमोलपठा में महिलाओं और पुरुषों की भीड़ द्वारा पुलिस व आबकारी टीम को भी खदेड़ दिया ।
इधर शराब ठेकेदारों ने भी आबकारी विभाग पर गंभीर सवाल उठाते हुए लाइसेंस सरेंडर करने की बात कही है। ठेकेदारों का दावा है कि वे करीब 500 करोड़ रुपये का राजस्व देकर लाइसेंस पर दुकानें चला रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही तोड़फोड़ और असुरक्षा के चलते कारोबार करना मुश्किल हो गया है। उनके मुताबिक अब तक करीब 50 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है।
सागर जहरीली शराब कांड के बाद जिले में एक के बाद एक सामने आ रहे विरोध प्रदर्शनों ने आबकारी विभाग की निगरानी और अवैध शराब की शिकायतों पर कार्रवाई को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल बड़ा है—यदि शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई होती, तो क्या हालात यहां तक पहुंचते? हालांकि सवाल यह भी है कि अबैध शराब के नामपर लायसेंसी शराब दुकानों को कंही षड्यंत्र के तहत निशाना तो नही बनवाया जा रहा है।
वहीं जिले में बिगड़ते हालातो के बाद आबकारी के जिला अधिकारी सौरभ दागोड़े मीडिया को आधिकारिक बयान देने के बजाए जिम्मेदारी से दूरी बनाते हुए कार्यालय छोड़कर चले गए वहीँ पुलिस के अधिकारी भी फिलहाल मीडिया के सामने अपना पक्ष नही रख रहे है। वहीं दिन प्रतिदिन हालत बिगड़ते नजर आ रहे है।
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