लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद (Akash Anand) को पार्टी से बाहर करने के बाद अब छोटे भतीजे ईशान आनंद को भी पार्टी की जिम्मेदारी से हटा दिया है। खास बात यह है कि ईशान को महज छह दिन पहले ही मुख्य सेक्टर कोआर्डिनेटर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए मायावती ने स्पष्ट किया कि वह अपने भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को भविष्य में बसपा में कोई छोटा या बड़ा राजनीतिक पद नहीं देंगी। उन्होंने कहा कि वह पारिवारिक मोह में पड़कर पार्टी और बहुजन आंदोलन को नुकसान नहीं होने देंगी।
मायावती ने बताया कि उन्होंने 3 सितंबर को आकाश आनंद को राष्ट्रीय कोआर्डिनेटर के पद से हटाया था। इसके बाद 7 सितंबर को छोटे भतीजे ईशान आनंद को मुख्य सेक्टर कोआर्डिनेटर बनाया गया था। अब ईशान से भी यह जिम्मेदारी वापस ले ली गई है।
मायावती ने अपनी पोस्ट में कहा कि बसपा के मिशन की सफलता में किसी भी व्यक्ति का बाधक बनना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनकी प्राथमिक चिंता केवल ‘बहुजन समाज परिवार’ के हित, कल्याण और उसे आत्मनिर्भर बनाने की है। उन्होंने कहा कि पार्टी के संस्थापक कांशीराम की परंपरा का पालन करते हुए उन्होंने अपने सगे भाई-बहनों, उनके परिवार के युवा सदस्यों और करीबी रिश्तेदारों को पार्टी के कार्यों तक सीमित रखा तथा सांसद, विधायक, मंत्री या किसी अन्य राजनीतिक लाभ के पद से दूर रखा।
आनंद कुमार को साथ रखने की बताई वजह
बसपा प्रमुख ने कहा कि अविवाहित होने के कारण उन्हें मजबूरी में अपने सबसे छोटे भाई आनंद कुमार को अपने साथ रखना पड़ा। उनके मुताबिक, आनंद कुमार उनकी देखभाल करने के साथ-साथ उनकी निगरानी में पार्टी की जिम्मेदारियां भी संभाल रहे हैं। हालांकि, अब उनके परिवार के सदस्यों को इसका राजनीतिक लाभ मिले, यह पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित में उचित नहीं होगा।
मायावती ने इसे अपना अंतिम फैसला और प्रतिज्ञा बताते हुए कहा कि आनंद कुमार के किसी भी बेटे को बसपा में छोटे या बड़े पद पर रहकर राजनीति करने का अवसर नहीं दिया जाएगा।
आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने से पहले मायावती ने उन्हें अल्टीमेटम भी दिया था। उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा था कि आकाश को तभी दोबारा कोई जिम्मेदारी दी जा सकती है, जब उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास ले लें।
इसके बाद गुरुवार सुबह आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। उन्होंने अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर राजनीतिक और सामाजिक जीवन से दूरी बनाने का ऐलान करते हुए बसपा के प्रति अपने समर्पण का भी उल्लेख किया।
इसके बाद मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने का फैसला सार्वजनिक किया। उन्होंने बुधवार को की गई अपनी पोस्ट को आकाश द्वारा रीपोस्ट नहीं किए जाने को लेकर भी उन पर तीखी टिप्पणी की थी।
मायावती ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास लेना देर से उठाया गया, लेकिन सही कदम है। उन्होंने कहा कि लोगों का मानना है कि अगर अशोक सिद्धार्थ ने यह फैसला पहले ही ले लिया होता तो बसपा, बहुजन समाज, बहुजन मूवमेंट और उनके दामाद आकाश आनंद को लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता।
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