img-fluid

AK-47 और रॉकेट लॉन्चर लेकर मरीब की ओर बढ़ा बनी हशीश कबीला, हूतियों के साथ गठजोड़ से सऊदी की बढ़ी चिंता

September 14, 2026

नई दिल्ली। यमन (Yemen) की पहाड़ियों से एक बार फिर कबीलाई ताकत के युद्धक्षेत्र में उतरने की तस्वीर सामने आई है। राजधानी सना (Sana) के पूर्वी पहाड़ी इलाकों से बनी हशीश कबीले (Hashish tribes) के हथियारबंद लड़ाकों (Armed fighters) की लामबंदी मरीब की ओर बढ़ रही है। किसी के हाथ में AK-47 है तो किसी के कंधे पर रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड लॉन्चर। पिकअप ट्रकों के साथ आगे बढ़ते इस काफिले में युवा और अधेड़ ही नहीं, 8-10 साल के बच्चे भी नजर आ रहे हैं। सदियों पुराने कबीलाई युद्ध के तौर-तरीकों और आधुनिक हथियारों का यह मेल यमन के बदलते युद्ध की एक अलग तस्वीर पेश करता है।

आज की इस लामबंदी में घोड़ों और ऊंटों की जगह पिकअप ट्रक हैं और तलवारों की जगह मशीनगन, मिसाइल और रॉकेट लॉन्चर। लेकिन लड़ाई के पीछे काम करने वाली कबीलाई ताकत अब भी काफी हद तक वही है। बनी हशीश का यह जमावड़ा इसलिए अहम है क्योंकि यह कबीला सना के बेहद करीब है और अब हूती सैन्य नेटवर्क के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।

सना के पास बसा है रणनीतिक रूप से अहम कबीला
बनी हशीश यमन का पुराना और प्रभावशाली कबीलाई समूह है। इसका इलाका राजधानी सना के पूर्व में फैले पहाड़ी क्षेत्र में है। राजधानी से नजदीकी के कारण इस क्षेत्र का रणनीतिक महत्व काफी अधिक है। यहां से सना के पूर्वी रास्तों और आसपास के इलाकों पर प्रभाव कायम किया जा सकता है।

यमन में जनजातियों की भूमिका केवल सामाजिक व्यवस्था तक सीमित नहीं रही है। देश की राजनीति और सैन्य संघर्षों में भी कबीलों का प्रभाव रहा है। बनी हशीश इसका बड़ा उदाहरण है। 2000 के दशक में इस कबीले के कुछ हिस्सों और हूती आंदोलन के बीच संघर्ष हुआ था, लेकिन 2014 में हूतियों के सना पर कब्जे के बाद दोनों के बीच शक्ति संतुलन बदल गया।


  • इसके बाद बनी हशीश के बड़े हिस्से हूती नियंत्रण में चले गए। आज कबीले के कई प्रभावशाली लोग और लड़ाके हूती नेटवर्क से जुड़े हैं। हूती नेतृत्व के लिए यह इलाका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राजधानी के करीब होने के कारण यहां से बड़ी संख्या में लड़ाकों को तेजी से लामबंद किया जा सकता है।

    कभी हूतियों से भिड़ा था बनी हशीश
    हूतियों और बनी हशीश के बीच संबंध हमेशा ऐसे नहीं थे। 2000 के दशक में हुसैन बद्र अल-दीन अल-हूती के नेतृत्व में आंदोलन के उभरने और 2004 के बाद हूती विद्रोह शुरू होने के दौरान उत्तरी यमन की कई जनजातियों की तरह बनी हशीश भी बदलते राजनीतिक समीकरणों का हिस्सा बना।

    हूती आंदोलन शुरुआत में सद्दा और उत्तरी यमन के जायदियों के बीच धार्मिक आंदोलन के रूप में उभरा था, लेकिन धीरे-धीरे उसका स्वरूप राजनीतिक और सैन्य आंदोलन में बदल गया। इसी दौरान बनी हशीश के कुछ हिस्सों और हूती लड़ाकों के बीच गंभीर संघर्ष हुआ। यह टकराव खासतौर पर 2008-09 के आसपास सामने आया।

    लेकिन 2014 के बाद परिस्थितियां बदल गईं। हूतियों ने सना पर कब्जा किया और इसके साथ राजधानी के आसपास उनकी सैन्य और राजनीतिक पकड़ मजबूत होती गई। इस प्रक्रिया में कई स्थानीय जनजातियां उनके साथ आईं या उनके नियंत्रण में चली गईं। बनी हशीश भी इसी बदलाव का हिस्सा बना।

    यही वजह है कि कबीले की मौजूदा लामबंदी को सिर्फ स्थानीय स्तर की सैन्य गतिविधि नहीं माना जा रहा। हूती मीडिया के जरिए ऐसी तस्वीरें सामने आना सना के आसपास की जनजातीय ताकत को अपने सैन्य ढांचे के साथ खड़ा दिखाने का संदेश भी है।

    निशाने पर मरीब क्यों?
    बनी हशीश के लड़ाकों की दिशा मरीब की ओर है और यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू है। मरीब यमन के उत्तर-मध्य हिस्से में स्थित है और सना से करीब 175 किलोमीटर पूर्व है। इसके पश्चिम में सना, उत्तर में अल-जौफ, दक्षिण में अल-बैदा और शबवा तथा पूर्व में हद्रमौत है।

    भौगोलिक स्थिति के लिहाज से मरीब सना और यमन के पूर्वी रेगिस्तानी इलाकों के बीच एक रणनीतिक कड़ी है। लेकिन इसकी अहमियत सिर्फ नक्शे तक सीमित नहीं है। मरीब यमन के तेल और गैस संसाधनों के लिए भी महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

    1980 के दशक में यहां यमन के बड़े व्यावसायिक तेल भंडार मिले थे। तेल और गैस के अलावा यहां देश का एक महत्वपूर्ण बिजली संयंत्र भी है। मरीब, शबवा और हद्रमौत को मिलाकर यमन का प्रमुख तेल-गैस बेल्ट बनता है। यही वजह है कि मरीब पर नियंत्रण की लड़ाई में सैन्य शक्ति के साथ ऊर्जा संसाधनों का सवाल भी जुड़ा है।

    मरीब पर कब्जा मतलब पूर्वी यमन में नई पकड़
    मरीब लंबे समय से हूतियों के विरोधी यमनी सरकार और स्थानीय कबीलों का मजबूत गढ़ रहा है। हूतियों के लिए मरीब पर नियंत्रण का अर्थ सना के पूर्व में अपनी स्थिति मजबूत करना, ऊर्जा संसाधनों तक पहुंच बढ़ाना और सरकार समर्थक ताकतों के महत्वपूर्ण ठिकाने को कमजोर करना होगा।

    2021 में भी हूती सेना ने मरीब पर कब्जे के लिए बड़ा अभियान चलाया था, लेकिन स्थानीय कबीलों और सरकार समर्थक बलों ने इसका मुकाबला किया था। अब 2026 में क्षेत्रीय हालात फिर तेजी से बदल रहे हैं।

    हूतियों ने पश्चिमी यमन में बड़े इलाकों और रणनीतिक बंदरगाहों पर बढ़त बनाई है। दूसरी तरफ सऊदी समर्थित यमनी बल भी जवाबी दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में मरीब की तरफ बनी हशीश की लामबंदी को व्यापक शक्ति संघर्ष के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    सऊदी अरब की चिंता क्यों बढ़ी?
    मरीब पर दबाव बढ़ने का असर केवल यमन तक सीमित नहीं रहेगा। मरीब फिलहाल सऊदी समर्थित यमनी सरकारी सेना के कब्जे में है। ऐसे में हूतियों की तरफ से यहां सैन्य दबाव बढ़ना सीधे तौर पर सऊदी अरब की रणनीतिक चिंता बढ़ाता है।

    मरीब सना और सऊदी सीमा के बीच महत्वपूर्ण रणनीतिक गलियारे में स्थित है। अगर हूतियों को यहां बढ़त मिलती है तो उन्हें यमन के तेल-गैस संसाधनों पर ज्यादा प्रभाव मिल सकता है। साथ ही सना के पूर्व में उनका सैन्य विस्तार मजबूत होगा और सऊदी सीमा की दिशा में रणनीतिक दबाव बढ़ सकता है।

    सऊदी अरब पहले से ही यमन के संघर्ष में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सरकार समर्थक बलों का समर्थन करता रहा है। इसलिए मरीब जैसे मजबूत गढ़ का कमजोर होना उसके लिए सिर्फ एक स्थानीय सैन्य नुकसान नहीं होगा।

    सबसे बड़ी चिंता यह है कि मरीब में हूतियों की स्थिति मजबूत होने पर उन्हें मिसाइल और ड्रोन हमलों के लिए ज्यादा ऑपरेशनल स्पेस और संसाधन मिल सकते हैं। यानी बनी हशीश के लड़ाकों का मरीब की ओर बढ़ना भले ही यमन के भीतर एक कबीलाई लामबंदी दिखाई दे, लेकिन इसके पीछे सत्ता, ऊर्जा संसाधन और क्षेत्रीय सुरक्षा—तीनों का बड़ा खेल छिपा है।

    यमन की पहाड़ियों से निकला यह काफिला इसलिए सऊदी के लिए एक और चुनौती का संकेत माना जा रहा है कि आधुनिक हथियारों से लैस हूती नेटवर्क को अब भी स्थानीय कबीलाई ताकत का सहारा मिल रहा है। मरीब इस संघर्ष का अगला बड़ा मोर्चा बनता है या नहीं, यह आने वाले दिनों की सैन्य गतिविधियों पर निर्भर करेगा।

    Share:

  • बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के काफिले पर आतंकी हमला, 23 से ज्यादा जवानों के मारे जाने की सूचना

    Mon Sep 14 , 2026
    इस्लामाबाद। पाकिस्तान (Pakistan) से एक बड़ी खबर सामने आई है। बलूचिस्तान (Balochistan) के लासबेला जिले (Lasbela District) में सुरक्षा बलों पर बड़ा हमला (Major attack) हुआ है। जानकारी के अनुसार यह हमला एन-25 राष्ट्रीय राजमार्ग पर किया गया, जहां पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) का काफिला जा रहा था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस हमले में […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved