
न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) के दौरान ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच बातचीत की कोशिशों के बीच होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर बड़ा बयान सामने आया है. एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा है कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाता है तो ईरान 7 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल सकता है. ईरान ने यह प्रस्ताव अमेरिका तक मध्यस्थों के जरिए पहले ही पहुंचाया है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के साथ बातचीत में होर्मुज को लेकर तेहरान की शर्तें रखीं. ईरानी पक्ष के मुताबिक, इनमें अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना, ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियां जारी करना और सभी मोर्चों पर जंग खत्म करना शामिल है. ईरानी प्रतिनिधिमंडल को न्यूयॉर्क में बातचीत आगे बढ़ाने का अधिकार भी दिया गया है।
गल्फ देशों ने भी बढ़ाई बातचीत की कोशिश
होर्मुज को लेकर कूटनीतिक कोशिशें सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं हैं. कतर ने कहा है कि वह पाकिस्तान के साथ मिलकर तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिश कर रहा है. सऊदी अरब, मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की ने भी बातचीत और कूटनीति का समर्थन किया है।
अराघची ने न्यूयॉर्क में कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से मुलाकात की. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गल्फ देशों के नेताओं के साथ बैठक की. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका सभी पक्षों की बात सुन रहा है और ईरान के साथ समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ सकती है।
बातचीत के बीच जारी है सैन्य दबाव
हालांकि बातचीत की कोशिशों के साथ दोनों तरफ से सख्त बयान भी जारी हैं. ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान ईरान को लेकर दबाव बढ़ाने की अपील की और बाद में तेहरान से जल्द फैसला लेने को कहा।
ईरान की तरफ से भी होर्मुज को लेकर साफ संकेत दिए गए हैं कि यह उसके लिए बातचीत में एक अहम मुद्दा है. ईरानी संसद के डिप्टी स्पीकर अली निकजाद ने कहा कि बातचीत अब होर्मुज से जुड़ गई है और ईरान स्ट्रेट को लेकर पीछे नहीं हटेगा।
यानी न्यूयॉर्क में चल रही कूटनीतिक हलचल के बीच होर्मुज स्ट्रेट अब ईरान-अमेरिका बातचीत का सबसे अहम मुद्दा बनता दिख रहा है. ईरान ने इसे खोलने के लिए 7 दिन का संकेत दिया है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को पहले सैन्य दबाव कम करने और ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाने जैसी शर्तें माननी होंगी।
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