
अग्निबाण की खबर फिर सही साबित… मामला अवैध कॉलोनियों के सम्पत्ति कर खाते खोलने और रजिस्ट्रियां रुकवाने के निगम फैसले का
पंजीयन विभाग ने जारी किया पत्र
इंदौर। पिछले दिनों नगर निगम (Municipal Corporation) ने जोर-शोर से महापौर परिषद् (Mayor’s Council) की बैठक के बाद मीडिया (Media) को फर्जी जानकारी परोस दी कि अब अवैध कॉलोनियों में सम्पत्तिकर (property taxes) के खाते तो खुलेंगे और उनकी रसीदों पर अधिवासी की सील लगा देंगे, मगर इन रसीदों के आधार पर रजिस्ट्रियां नहीं हो सकेंगी। मगर पंजीयन विभाग ने पहले भी स्पष्ट किया कि रजिस्ट्रियां रोकने का अधिकार निगम सहित किसी भी विभाग को नहीं है और अब वरिष्ठ जिला पंजीयक मंजुलता पटेल ने निगमायुक्त सहित प्राधिकरण व तहसीलदारों को पत्र लिखकर स्पष्ट कहा कि अगर रजिस्ट्रियों पर कहीं रोक लगाई हो तो उसे तुरंत समाप्त किया जाए। कुछ समय पूर्व ही प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर भी इस आशय का स्पष्ट पत्र सभी संभागायुक्त और कलेक्टर को भेज चुके हैं।
अग्निबाण ने महापौर परिषद् की बैठक और उसमें लिए गए अवैध फैसले का खुलासा तब ही कर दिया था और एक बार फिर अग्निबाण की खबर सही साबित हुई। अभी वरिष्ठ जिला पंजीयक ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा कि विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों के पंजीयन, यानी रजिस्ट्री पर आदेशों के जरिए रोक लगा दी जाती है या अनापत्ति, यानी एनओसी के बाद ही रजिस्ट्री करने के आदेश किए जाते हैं। लिहाजा कलेक्टर द्वारा भी इस संबंध में निर्देश दिए जा चुके हैं और उक्त पत्र भी कलेक्टर द्वारा ही अनुमोदित कर आयुक्त नगर निगम, सीईओ प्राधिकरण, जिला पंचायत, सभी अपर कलेक्टर, तहसीलदार से लेकर मुख्य नगर पालिका और नगर पंचायत अधिकारियों को भेजा गया है। इस पत्र में स्पष्ट कहा गया कि अगर कोर्ट ने कोई आदेश पारित कर रजिस्ट्रियों पर रोक लगाई है या विशेष परिस्थितियों में कोई आदेश जारी हुए हैं, उसी आधार पर पंजीयन रोके जा सकते हैं। इसके अलावा नगर निगम सहित किसी भी विभाग को कोई अधिकार नहीं है कि वह रजिस्ट्रियों पर रोक लगवाने के निर्देश पंजीयन विभाग को भेजे। इस संबंध में पंजीयन विभाग से जुड़े अभिभाषक प्रमोदकुमार द्विवेदी का कहना है कि नगर निगम सहित किसी भी विभाग को रजिस्ट्रियां रुकवाने का अधिकार है ही नहीं और लगातार अभिभाषक संघ द्वारा भी यही बात कही जाती रही। एक तरफ पंजीयन विभाग रजिस्ट्रियों पर रोक की घोषणा करता है, दूसरी तरफ पिछले दरवाजे से लेन-देन के जरिए रजिस्ट्रियां होती भी रही हैं, जिनके खुलासे भी पिछले दिनों उनके द्वारा किए गए। जब शासन आदेश स्पष्ट है तो फिर नगर निगम कैसे अवैध कॉलोनियों या अन्य जगह रजिस्ट्रियों पर रोक लगाने संबंधी प्रस्ताव मंजूर कर सकता है। इस संबंध में वरिष्ठ जिला पंजीयक मंजुलता पटेल ने अभी स्पष्ट आदेश भी जारी कर दिया है, जिसमें किसी को भी रजिस्ट्री रुकवाने के अधिकार न होने की बात कही गई है।
प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर भी दे चुके हैं स्पष्ट लिखित आदेश
कुछ समय पूर्व ही 26 मई को प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर अमित राठौर ने 5 पेज का एक विस्तृत पत्र सभी संभागायुक्त-कलेक्टरों को भिजवाया, जिसमें उन्होंने कहा कि यह देखने में आया है कि जिला स्तर पर कतिपय अधिकारियों द्वारा अवैध कॉलोनाइजेशन के आधार पर जमीनों के क्रय-विक्रय, अंतरण पर रोक लगवा दी जाती है। इस मामले में यह स्पष्ट है कि सिर्फ कोर्ट आदेश या अन्य परिस्थितियों के चलते ही इस तरह के अस्थायी प्रतिबंध संभव हैं और सामान्य परिस्थिति या बिना सक्षम प्राधिकारिता के दस्तावेजों के पंजीयन पर प्रतिबंध लगवाना विधिसंगत नहीं है और ऐसे आदेश निष्फल माने जाएंगे। प्रमुख सचिव ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए कुछ न्याय दृष्टांत का भी उल्लेख किया है।
महापौर परिषद् का फैसल भी हो गया अवैध घोषित
कुछ दिनों पूर्व महापौर परिषद् ने निर्णय लिया कि अवैध कॉलोनियों में सम्पत्तिकर के खाते तो खोले जाएंगे, मगर उनके आधार पर रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी। उस वक्त भी अग्निबाण ने यह स्पष्ट कहा था कि इस तरह रजिस्ट्रियां रुकवाने का अधिकार महापौर परिषद् या आयुक्त को नहीं है और यह बात सही भी निकली। अभी वरिष्ठ जिला पंजीयक ने निगमायुक्त को ही पत्र लिखकर कहा कि रजिस्ट्रियों पर रोक नहीं लगाई जा सकती। पंजीयन विभाग का कहना है कि पहले से ही सरकारी, नजूल, विवादित या भूमाफियाओं से संबंधित गृह निर्माण संस्थाओं और ऐसे प्रकरणों में भी शासन-प्रशासन की मंशानुरूप रजिस्ट्रियां रोकी जाती हैं, लेकिन इसके अलावा निगम, प्राधिकरण या अन्य कोई महकमा अपने मनमुताबिक रोक नहीं लगवा सकता।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved