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इंदौर की हवा में घुला जहरीला धुआं, कल दिल्ली से ज्यादा प्रदूषित हुआ शहर

November 07, 2026

  • रीगल सर्कल पर हवा में पीएम-10 की मात्रा 500 तो दिल्ली में 459 माइक्रोग्राम घनमीटर
  • रात 10 बजे के आसपास हवा में सबसे ज्यादा जहरीले कण रहे

इंदौर, विकाससिंह राठौर।
स्वच्छता में देशभर (India) में पहचान बनाने वाले इंदौर (Indore) की हवा (Air) अब चिंता बढ़ाने लगी है। धनतेरस (Dhanteras) की आतिशबाजी (Fireworks) ने शहर के प्रदूषण को ऐसे स्तर पर पहुंचा दिया, जिसने अब तक के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। शहर के मध्य क्षेत्र रीगल सर्कल पर पीएम-10 का स्तर पहली बार 500 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक पहुंच गया। यह इस साल इस मॉनीटरिंग केंद्र पर दर्ज अब तक का सबसे गंभीर स्तर है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उपलब्ध आंकड़ों में दिल्ली के सबसे प्रदूषित मॉनीटरिंग स्टेशन पर दर्ज पीएम-10 के 459 के स्तर से भी इंदौर का आंकड़ा अधिक रहा। यानी धनतेरस की रात इंदौर के एक इलाके की हवा में प्रदूषण का स्तर दिल्ली के सबसे प्रदूषित स्टेशन की रीडिंग से भी ऊपर निकल गया।

प्रदूषण निगरानी केंद्र के पिछले 24 घंटे के आंकड़ों के अनुसार पीएम-10 का औसत स्तर भी 233 रहा, जबकि अधिकतम स्तर 500 दर्ज किया गया। वहीं पीएम-2.5 की अधिकतम मात्रा 342 और औसत 190 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रही। ये वे सूक्ष्म कण हैं, जो सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।


  • रात 10 बजे प्रदूषण ने पार की सारी हदें
    आंकड़ों के अनुसार शाम ढलने के बाद प्रदूषण तेजी से बढ़ना शुरू हुआ। शाम 7 बजे के आसपास पीएम-10 का स्तर 300 के पार पहुंच गया और रात 10 बजे के करीब यह 500 तक जा पहुंचा। इसके बाद भी पूरी रात प्रदूषण का स्तर ऊंचा बना रहा। आज सुबह 8 बजे भी पीएम-10 की मात्रा 336.75 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज की गई, यानी रातभर हुई आतिशबाजी का धुआं सुबह तक हवा में मौजूद रहा। यह स्थिति बताती है कि आतिशबाजी का असर केवल कुछ घंटों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अगले दिन सुबह तक लोगों को प्रदूषित हवा में सांस लेनी पड़ी।

    पांच दिन में 79 से 233 पर पहुंचा
    छोटी ग्वालटोली में नवंबर की शुरुआत से ही हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही थी। 1 नवंबर को यहां औसत एक्यूआई 79 दर्ज किया गया था। इसके बाद 2 नवंबर को 101, 3 नवंबर को 131, 4 नवंबर को 172 और 5 नवंबर को 131 रहा। 6 नवंबर को यह अचानक बढ़कर 220 पर पहुंच गया और आज सुबह 233 दर्ज किया गया। यानी संतोषजनक श्रेणी से शुरू हुआ प्रदूषण अब खराब श्रेणी में पहुंच चुका है। लगातार पांच दिनों से यहां एक्यूआई 100 के ऊपर बना हुआ है।

    शहर के मध्य में सबसे ज्यादा प्रदूषण
    शहर के पांच सक्रिय मॉनीटरिंग स्टेशनों में रीगल सर्कल सबसे प्रदूषित क्षेत्र रहा। यहां एक्यूआई औसत 233 दर्ज किया गया। इसके अलावा मुग्धा नगर (मोती तबेला) में 174, रेसीडेंसी एरिया में 167 और एयरपोर्ट क्षेत्र में 101 रहा। इसके विपरीत रीजनल पार्क क्षेत्र में एक्यूआई 45 दर्ज किया गया। शहर के मध्य में स्थित रीगल सर्कल पर सबसे ज्यादा प्रदूषण दर्ज होना चिंता बढ़ाने वाला है, क्योंकि इस क्षेत्र में यातायात और लोगों की आवाजाही भी लगातार बनी रहती है।

    हवा की रफ्तार कम, धुआं जमा
    आतिशबाजी से निकलने वाला धुआं, वाहनों का उत्सर्जन और धूल के कण मिलकर हवा की गुणवत्ता बिगाड़ रहे हैं। हवा की रफ्तार कम होने से प्रदूषक कण वातावरण से जल्दी बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। पीएम-2.5 के बेहद छोटे कण सांस के जरिए फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। ऐसे में अस्थमा, एलर्जी, सांस और हृदय संबंधी बीमारियों से परेशान लोगों के लिए स्थिति ज्यादा खतरनाक हो सकती है। बच्चों और बुजुर्गों को भी प्रदूषित हवा से परेशानी होने की आशंका है।

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