
इस्लामाबाद । सीमा पार आतंकवाद (Terrorism) को लेकर भारत और पाकिस्तान (India and Pakistan) में तनाव की स्थिति बरकरार ही रहती है। अंतरराष्ट्रीय मंचों (International forums) पर अकसर भारत (India) पाकिस्तान (Pakistan) को आईना (Mirror) दिखा देता है। वहीं पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मच पर गिड़गिड़ाता हुआ नजर आता है। पाकिस्तान के रवैये को देखते हुए भारत उसके साथ कूटनीतक संबंध नहीं रखता है। इसके बाद भी भारत का एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान जा रहा है।
पीएम मोदी को भी मिलेगा न्योता
रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 से 30 सितंबर तक पाकिस्तान में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (Shanghai Cooperation Organization- SCO) नेशनल कोऑर्डिनेटर्स की बैठक है। इसी बैठक में एससीओ सम्मेलन की तारीख का भी ऐलान हो सकता है। इस साल इसकी मेजबानी पाकिस्तान ही करेगा। इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का भी न्योता आना तय है। बता दें कि 2017 में भारत इस समूह में शामिल हुआ था।
भारत की तरफ से कौन जाएगा
भारत एससीओ की बैठकों और शिखर सम्मेलनों में हमेशा शामिल होता है। नेशनल कोऑर्डिनेटर की मीटिंग में भारत की ओर से आलोक डिमरी शामिल हो सकते हैं। बता दें कि दोनों देशों में तनाव के बाद भी एससीओ के कार्यक्रमों में भारत और पाकिस्तान दोनों हिस्सा लेते हैं। अब सवाल यही है कि पाकिस्तान के आमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान जाएंगे या नहीं? आपको बता दें कि 2016 में 19वें सार्क सम्मेलन का आयोजन पाकिस्तान में होना था लेकिन उससे पहले उरी में आतंकी हमला हुआ और पीएम मोदी ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था।
भारत के रुख को देखते हुए फिर कोई सार्क शिखर सम्मेलन का आयोजन ही नहीं हुआ। भारत भी बिम्सटेक, क्वार्ड और ब्रिक्स जैसे संगठनों पर फोकस करना शुरू कर दिया। आपको बता दें कि 2025 में हुए पहलगाम हमले के बाद भारत का रुख पाकिस्तान के प्रति एकदम सख्त है। भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर रखा है जिसकी वजह से पाकिस्तान की जान सूख रही है। वहीं पाकिस्तान अंदरूनी कलह और आतंकवाद का भी सामना कर रहा है। अब तो पाकिस्तान के भी राजनयिक स्वीकार करने लगे हैं कि सांप पालने वाले को खुद ही डसने का खतरा होता है।
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