
नई दिल्ली ।
आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) पर निशाना साधते हुए उनके 12 साल के शासन को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने भाई-भतीजावाद (Nepotism) के मुद्दे पर अडानी (Adani)और जय शाह(JayShah) का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि जिस तरह की उम्मीद लोगों ने 2014 में नई सरकार से की थी, वह पूरी नहीं हुई।
केजरीवाल ने कहा कि उस समय लोगों को उम्मीद थी कि एक नया चेहरा और नई ऊर्जा देश में बदलाव लाएगी। लोगों को यह भी लगता था कि प्रधानमंत्री के आगे-पीछे कोई नहीं है, इसलिए भाई-भतीजावाद समाप्त होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि आज प्रधानमंत्री मोदी खुद भाई-भतीजावाद की सबसे बड़ी मिसाल बन गए हैं।
केजरीवाल ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी का एक ‘भाई’ है, जिसे वह बहुत प्यार करते हैं और उसका नाम अडानी है। उनके अनुसार, पिछले 12 वर्षों में अगर किसी एक व्यक्ति ने सबसे ज्यादा पैसा कमाया है तो वह अडानी हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के एक ‘भतीजे’ का भी जिक्र करते हुए जय शाह का नाम लिया और कहा कि 12 वर्षों में किसी युवा ने सबसे ज्यादा तरक्की की है तो वह जय शाह हैं।
उन्होंने राजनीतिक दलबदल को लेकर भी सवाल उठाए। केजरीवाल ने कहा कि एक समय पार्टी बदलने और विधायकों की खरीद-फरोख्त को अनैतिक माना जाता था। उन्होंने 1980 के दशक में हुए दलबदल के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी तरह की परिस्थितियों के बीच दलबदल विरोधी कानून बनाया गया था।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि आज बड़े पैमाने पर विधायक और सांसद खरीदे-बेचे जा रहे हैं तथा सरकारें गिराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए ईडी, सीबीआई और पैसे के इस्तेमाल के आरोप लगते हैं। उन्होंने ऐसे राजनीतिक तौर-तरीकों को ‘चाणक्य’ की रणनीति बताने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि इसे चाणक्य की उपमा देना उचित नहीं है।
उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपने करियर के बारे में नहीं सोचा। केजरीवाल ने बताया कि वह इनकम टैक्स विभाग में ज्वाइंट कमिश्नर थे, लेकिन नौकरी छोड़कर झुग्गियों में रहने लगे और करीब 10 साल वहां काम किया। उन्होंने कहा कि उनकी महत्वाकांक्षा व्यक्तिगत नहीं थी, बल्कि देश को लेकर थी। उनके अनुसार, अगर लोकपाल आंदोलन के समय लोकपाल कानून बन गया होता तो राजनीतिक पार्टी बनाने की जरूरत नहीं पड़ती।
एसआईआर के मुद्दे पर केजरीवाल ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के अधिकारी पूरे देश की मतदाता सूची में किसी का वोट हटाने और किसी का वोट जोड़ने की शक्ति रखते हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया और कहा कि यदि मतदाता सूची में मनमाने तरीके से बदलाव हो सकता है तो सरकार बदलने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
केजरीवाल ने 2 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन का भी जिक्र किया और उम्मीद जताई कि इसके बाद चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना पड़ेगा तथा लोगों को एसआईआर से मुक्ति मिलेगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के 12 साल के कार्यकाल पर भी सवाल उठाए। केजरीवाल ने कहा कि 2014 में भाजपा को 282 और 2019 में 303 सीटें मिली थीं। उनके अनुसार, 10 वर्षों में देश को दुनिया का नंबर एक देश बनाने का अवसर था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
केजरीवाल ने मीडिया, चुनाव आयोग, बैंकिंग, रेलवे और विमानन क्षेत्र को लेकर भी सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने चीन के साथ संबंधों और प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार कई मोर्चों पर विफल रही है। उन्होंने विमानन क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले कई एयरलाइंस के विकल्प मौजूद थे, जबकि अब मुख्य रूप से इंडिगो और एयर इंडिया ही बची हैं।
केजरीवाल ने अंत में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री के पुराने नारे का जिक्र किया और आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देश में बड़े पैमाने पर धन अर्जित किया गया। उन्होंने कांग्रेस के लंबे शासनकाल और मोदी सरकार के कार्यकाल की तुलना करते हुए भी गंभीर आरोप लगाए।
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