
नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन (Climate change)के कारण समुद्र का जलस्तर (Sea level)लगातार बढ़ रहा है और इसका असर आने वाले समय में सिर्फ तटीय जमीन तक सीमित नहीं रह सकता। एक नई वैज्ञानिक स्टडी (Scientific study)में 122 समुद्री इनवेसिव प्रजातियों(Marine invasive species) का अध्ययन किया गया है। इसमें सामने आया है कि समुद्र का पानी बढ़ने के साथ ऐसी समुद्री प्रजातियों को नए इलाकों में फैलने का मौका मिल सकता है जो वहां की मूल प्रजातियां नहीं हैं। यानी समुद्र का बढ़ता जलस्तर तटीय क्षेत्रों के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर सकता है।
स्टडी के अनुसार 2050 तक समुद्र का बढ़ता पानी करीब 3.6 लाख वर्ग किलोमीटर तटीय जमीन को प्रभावित कर सकता है। 2100 तक यह क्षेत्र करीब 5.5 लाख वर्ग किलोमीटर तक पहुंचने का अनुमान है। वैज्ञानिकों ने यह भी आकलन किया है कि इस जलमग्न होने वाले क्षेत्र के बड़े हिस्से में समुद्री इनवेसिव प्रजातियों के रहने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। अध्ययन के मुताबिक करीब 2.9 लाख से 4.7 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र इन प्रजातियों के लिए संभावित नया ठिकाना बन सकता है।
वैज्ञानिकों ने जिन 122 प्रजातियों का अध्ययन किया है उनमें मछलियां क्रस्टेशियन मोलस्क और सी स्टार जैसी समुद्री प्रजातियां शामिल हैं। इनमें से कई जीव अपने मूल क्षेत्र से बाहर पहले ही फैल चुके हैं। शोध में अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों के आधार पर यह समझने की कोशिश की गई कि समुद्र का स्तर बढ़ने के बाद ये प्रजातियां किन नए क्षेत्रों तक पहुंच सकती हैं। नए इलाकों में पहुंचने के बाद इनका सामना वहां पहले से मौजूद स्थानीय प्रजातियों से हो सकता है जिससे भोजन और रहने की जगह के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने की आशंका है।
समुद्र का जलस्तर बढ़ने की दो प्रमुख वजहें बताई गई हैं। पहली वजह समुद्र के पानी का गर्म होने पर फैलना है। दूसरी वजह ग्लेशियर और आइस शीट के पिघलने से समुद्र में अतिरिक्त पानी का पहुंचना है। अध्ययन के अनुमान के मुताबिक 2050 तक समुद्र का स्तर करीब 20 सेंटीमीटर और 2100 तक करीब 56 सेंटीमीटर बढ़ सकता है। जलस्तर में यह बदलाव तटीय इलाकों की भौगोलिक स्थिति के साथ वहां रहने वाले जीवों के लिए उपलब्ध आवास को भी बदल सकता है।
स्टडी में दुनिया के कई ऐसे क्षेत्रों का भी उल्लेख किया गया है जहां इन समुद्री जीवों के फैलने का खतरा ज्यादा हो सकता है। इनमें अमेरिका का पूर्वी तट गल्फ ऑफ मेक्सिको नॉर्थ सी गल्फ ऑफ गिनी अरेबियन गल्फ उत्तरी बंगाल की खाड़ी दक्षिण पूर्वी चीन और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। एस्ट्यूरी यानी वे क्षेत्र जहां नदी का पानी समुद्र से मिलता है वहां भी जोखिम अधिक हो सकता है। इन इलाकों का समुद्र से सीधा संपर्क होने के साथ मानवीय गतिविधियां भी ज्यादा होती हैं।
इनवेसिव प्रजातियों का फैलाव पहले से ही दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा चुका है। यूरोप में पैसिफिक ऑयस्टर अटलांटिक ब्लू क्रैब और वेन्ड रापा व्हेल्क इसके उदाहरण बताए गए हैं। समुद्र का पानी आगे बढ़ने पर ऐसे जीवों को नए क्षेत्रों तक पहुंचने और वहां रहने का अवसर मिल सकता है। इससे स्थानीय समुद्री प्रजातियों पर दबाव बढ़ सकता है और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव आ सकता है।
इस बदलाव का असर केवल पर्यावरण तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। इनवेसिव प्रजातियां समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करने के साथ मछली पकड़ने और तटीय क्षेत्रों से जुड़े दूसरे आर्थिक कामों को भी प्रभावित कर सकती हैं। अध्ययन में आईपीबीईएस के हवाले से बताया गया है कि 2019 में जैविक आक्रमण से दुनिया भर में 423 अरब डॉलर से ज्यादा का आर्थिक नुकसान हुआ था। ऐसे में समुद्र के बढ़ते जलस्तर की निगरानी के साथ इनवेसिव प्रजातियों के संभावित फैलाव को भी तटीय इलाकों की योजना और पर्यावरण प्रबंधन में शामिल करना जरूरी हो सकता है।
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