
नई दिल्ली । केंद्र सरकार (Central Government) ने रबी फसलों की एमएसपी में (In MSP of Rabi Crops) बढ़ोतरी को मंजूरी दी (Has approved an Increase) ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने बुधवार को विपणन सत्र 2027-28 के लिए सभी अनिवार्य रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी। एमएसपी में सबसे अधिक बढ़ोतरी कुसुम के लिए 675 रुपए प्रति क्विंटल की गई है। इसके बाद रेपसीड और सरसों के एमएसपी में 413 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। आधिकारिक बयान के अनुसार, मसूर की एमएसपी में 390 रुपए प्रति क्विंटल, जौ में 136 रुपए प्रति क्विंटल, चने में 83 रुपए प्रति क्विंटल और गेहूं में 25 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। सरकार ने रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए रबी फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की है।
बयान में कहा गया कि विपणन सत्र 2027-28 के लिए अनिवार्य रबी फसलों के एमएसपी में यह बढ़ोतरी केंद्रीय बजट 2018-19 में की गई घोषणा के अनुरूप है। इसके तहत एमएसपी को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर तय किया जाता है। हाल के वर्षों में सरकार अनाज के अलावा दालों और तिलहनों जैसी फसलों की खेती को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए इन फसलों पर अपेक्षाकृत अधिक एमएसपी की पेशकश की जा रही है। वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान गेहूं की खरीद बढ़कर 3,715 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) हो गई, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2,254 एलएमटी थी।
वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान छह रबी फसलों की खरीद बढ़कर 3,921 एलएमटी हो गई, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2,302 एलएमटी थी। वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान गेहूं उत्पादक किसानों को एमएसपी के रूप में किया गया भुगतान बढ़कर 7.31 लाख करोड़ रुपए हो गया, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2.56 लाख करोड़ रुपए था। इसके अलावा, वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान छह रबी फसलों के उत्पादक किसानों को एमएसपी के रूप में किया गया भुगतान बढ़कर 8.36 लाख करोड़ रुपए हो गया, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2.65 लाख करोड़ रुपए था।
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