
मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों के बीच INDIA ब्लॉक ने आंदोलन को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है। 30 सितंबर को हुई विपक्षी दलों की बैठक के बाद गठबंधन ने 2 से 8 अक्टूबर तक ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ आयोजित करने की घोषणा की है। इसके तहत अलग-अलग जिलों में विरोध कार्यक्रम होंगे और 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे।
विवाद की पृष्ठभूमि में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियां हैं। हाल में रिपोर्टों में चुनाव आयोग के भीतर मतदाता सूची में बदलावों को लेकर अधिकारियों के बीच सवाल-जवाब की बात सामने आई थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने वोटर-रोल सॉफ्टवेयर की समीक्षा के लिए प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी है। आयोग ने कहा है कि वह कानूनी प्रक्रियाओं के तहत काम कर रहा है।
ECI के आधिकारिक पोर्टल पर भी SIR-2026 से जुड़े एन्यूमरेशन फॉर्म, अंतिम SIR में नाम खोजने और नोटिस मिलने पर दस्तावेज जमा करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
INDIA ब्लॉक के घोषित कार्यक्रम के मुताबिक 2 से 8 अक्टूबर तक ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ के तहत विरोध कार्यक्रम होंगे। 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद चुनाव आयोग की ओर मार्च करेंगे। गठबंधन के नेताओं ने इसे चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज कराने का माध्यम बताया है।
इसी राजनीतिक विवाद के बीच Nationalist Citizens Party of India (NCPI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की है। पार्टी अध्यक्ष ज्योतिप्रकाश चटर्जी ने पत्र में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने आकलन का हवाला देते हुए यह मांग रखी है।
गौरतलब है कि ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था। इससे पहले वे मार्च 2024 से चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यरत थे।
SIR और चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक दलों के रुख में स्पष्ट अंतर है। विपक्षी दल प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया को कानूनी नियमों के अनुरूप बताया है। दूसरी ओर, BJP नेताओं ने INDIA ब्लॉक के प्रस्तावित मार्च की आलोचना की है और उसके उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं।
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