
उज्जैन। सनातन धर्म से जुड़े धार्मिक स्थलों, मंदिरों, मठों, अखाड़ों और परंपराओं पर होने वाले फैसलों के लिए मध्यप्रदेश में सनातन धर्म आयोग या समानांतर संस्था बनाने का प्रस्ताव सामने आया है। यह सुझाव जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी शैलेश आनंद गिरि ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में दिया है।
13 अखाड़ों से लेकर शंकराचार्य परंपरा तक प्रतिनिधित्व
प्रस्ताव में आयोग में तेरह अखाड़ों, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, पांच वैष्णवाचार्य परंपराओं और शंकराचार्य परंपरा के प्रतिनिधियों को शामिल करने का सुझाव है। इसके अलावा नगर और क्षेत्र की विद्वत परिषदों के प्रतिनिधि, धर्म एवं संस्कृति के जानकार, विधि विशेषज्ञ, सेवानिवृत्त या अनुभवी न्यायाधीश, संस्कृत, वेद, धर्मशास्त्र और भारतीय दर्शन के विशेषज्ञों को भी जगह देने की बात कही गई है।आवश्यकता के अनुसार प्रशासनिक और पुरातत्व विशेषज्ञों को भी आयोग से जोड़ा जा सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक इसका उद्देश्य किसी एक परंपरा को प्राथमिकता देना नहीं, बल्कि अलग-अलग सनातन परंपराओं और विशेषज्ञता को एक मंच पर लाना होगा।
धार्मिक विवादों में बनेगा परामर्श का मंच
स्वामी शैलेश आनंद गिरि ने कहा है कि धार्मिक मामलों में कई बार शास्त्रीय परंपरा, स्थानीय मान्यताओं, कानूनी प्रावधानों और प्रशासनिक जरूरतों के बीच मतभेद की स्थिति बनती है। ऐसे मामलों में आयोग एक विशेषज्ञ परामर्श मंच की भूमिका निभा सकता है। प्रस्ताव में दावा किया गया है कि इससे संबंधित पक्षों को समयबद्ध मार्गदर्शन मिल सकता है और विवादों के न्यायालय तक पहुंचने की स्थिति भी कम हो सकती है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस विषय पर संत समाज, विशेषज्ञों और विधि विशेषज्ञों के साथ व्यापक विमर्श कराने की मांग की है। साथ ही कहा है कि मध्यप्रदेश से ऐसी व्यवस्था शुरू होती है तो इसे देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल के रूप में देखा जा सकता है।
स्वयं समन्वय की जिम्मेदारी संभालने की पेशकश
महामंडलेश्वर स्वामी शैलेश आनंद गिरि ने पत्र के अंत में आयोग से जुड़ी प्रारंभिक प्रस्तावनाओं पर चर्चा और समन्वय के लिए स्वयं सेवा देने की इच्छा भी जताई है। उन्होंने अपने प्रस्ताव को 22 सितंबर को मुख्यमंत्री के नाम भेजा है।
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