
उज्जैन। उज्जैन सहित पूरे मध्यप्रदेश से मानसून की अधिकृत बिदाई हो गई है। मध्यप्रदेश के ज्यादातर हिस्सों को प्यासा ही छोड़कर मानसून इस साल बिदा हो गया, जबकि पिछले साल 4 अक्टूबर तक जमकर बारिश हुई थी। शहर उम्मीद कर रहा था कि इस बार भी पिछले साल की तरह विदा होता मानसून अच्छी बारिश देगा, लेकिन इस उम्मीद पर भी पानी फिर गया।
मौसम विभाग के अनुसार पिछले साल 4 अक्टूबर तक 5 इंच बारिश दर्ज की गई थी। इसके साथ बारिश का कुल आंकड़ा 36 इंच पर पहुंच गया था, लेकिन इस साल 1 जून से शुरू हुए मानसून सीजन में अब तक कुल 24 इंच बारिश ही मिल पाई है। मानसून सीजन में उज्जैन में औसत 37 इंच बारिश होती है, लेकिन इस साल हुई बारिश औसत से 35 प्रतिशत कम है और अब इतनी बारिश के साथ ही शहर को पूरा साल गुजारना है, जिसके चलते जलसंकट का सामना शहरवासियों को करना पड़ेगा। डेम में 100 दिन प्रदाय करने जितना बचा है।
कम वर्षा से भूजल स्तर और नीचे चला गया
बारिश के मामले में उज्जैन शहर से ज्यादा जिले के कुछ ग्रामीण क्षेत्र भी प्रभावित हैं। वहीं कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां अच्छा पानी बरसा है। इधर कम बारिश से जहां गंभीर डेम आधा ही भर पाया है, वहीं भूजल का स्तर भी नीचे चला गया है और आने वाले दो-तीन महीने बाद पानी की जमकर किल्लत का सामना करना पड़ेगा। कुओं और बोरिंगों से भी जरुरत जितना पानी ही मिल पाएगा।
पानी की अपव्यय पर रोक लगाना जरुरी
कम वर्षा के चलते दिसंबर के अंत तक पानी की समस्या खड़ी हो जाएगी, इसके चलते नगर निगम और प्रशासन को अभी से पानी के अपव्यय रोक लगाने के उपाय करने चाहिए। कई जगहों पर लोग घरों के आगे घंटों पानी ढोलकर सफाई करते नजर आते हैं, वहीं कई जगहों पर बिना टोटी के नलों से पानी बहता रहता है।
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